हिन्दी भाषा की ताकत से ही मैं ज्यादा लोगों तक पहुंचा हूं: मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भोपाल में विश्व हिन्दी सम्मेलन में कहा कि मैं आज हिन्दी भाषा की ताकत के कारण ही ज्यादा लोगों तक पहुंच सका हूं। मैं तो गुजराती भाषी था और चाय बेचते-बेचते हिन्दी सीख ली। आज जो हूं वह हिन्दी के कारण हूं।
विश्व हिन्दी सम्मेलन का शुभारंभ करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि हिन्दी को समृद्ध बनाने के लिए हमें दूसरी भाषाओं और बोलियों की अच्छी चीजों को लेकर समय-समय पर उन्हें जोड़ना चाहिए। अगर हमें हिन्दी को बचाना है तो इसके विकास की तरफ ध्यान देना होगा। दुनिया में छह हजार भाषाएं हैं लेकिन 21 वीं सदी जाते-जाते 90 फीसदी भाषाएं विलुप्त होने की स्थिति में आ जाएंगी। आज हम जिस तरह किसी विलुप्त पक्षी या पशु या अन्य चीजों के संरक्षण के लिए खर्च की सीमा नहीं देखते और कहीं ऐसा न हो कि आने वाली पीढ़ियों को हिन्दी के लिए भी ऐसा ही कुछ करना पड़े। तब यह कहा जाए कि हिन्दी हुआ करती थी और उससे लोग कैसे अपने विचार एकदूसरे तक पहुंचाते थे।
मोदी ने कहा कि महात्मा गांधी और ऐसे ही कई अन्य लोगों ने हिन्दी के संरक्षण व संवर्द्धन के लिए काम किया है। इनमें से अधिकांश अहिन्दी भाषी रहे हैं। इसके पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा कि भोपाल में सम्मेलन के आयोजन के पीछे एक कारण यह भी है कि वे प्रदेश का लोकसभा में प्रतिनिधित्व करती हैं। अंत विदेश राज्यमंत्री वीके सिंह ने आभार व्यक्त किया। आयोजन में कई राज्यों के राज्यपाल, मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री व विदेशों से भी कई प्रतिनिधि आए।

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