हर बच्चे को अनिवार्य स्कूली शिक्षा देना समाज और सरकार की साझा जिम्मेदारी

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज ‘स्कूल चलें हम अभियान 2018’ का शुभारंभ किया। उन्होंने समाज के सक्षम नागरिकों से अपील की कि वे सचेत रहें और देखें कि पास-पड़ोस, शहर-गाँव का हर बच्चा स्कूल जाए। उन्होंने कहा कि हर बच्चे को अनिवार्य स्कूली शिक्षा देना समाज और सरकार की साझा जिम्मेदारी है।

श्री चौहान ने स्थानीय समन्वय भवन में आयोजित कार्यक्रम में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा पठन-पाठन में नवाचार की सराहना करते हुए कहा कि पढ़ाई आनंददायक होना चाहिए। पढ़ाई बोझ नहीं लगना चाहिए। उन्होंने कहा कि हर बच्चे में प्रतिभा, ऊर्जा और क्षमता होती है। बच्चों में झिझक और हिचक टूटना चाहिए। झिझक से प्रतिभा दब जाती है। उन्होंने बच्चों से कहा कि कभी भी झिझकें नहीं और न ही डरें। उन्होंने बच्चों से जीवन में महान काम करने का मंत्र साझा करते हुए बताया कि जो भी अच्छा पढ़ो, उसे जीवन में उतारो। उन्होंने धर्मराज युधिष्ठिर और महात्मा गांधी का उदाहरण दिया। श्री चौहान ने कहा कि बच्चों में भारत का निर्माण करने की क्षमता है । उनकी क्षमता को निखारने और आगे लाने की जिम्मेदारी शिक्षक और समाज दोनों की है । उन्होंने बच्चों को आश्वस्त किया कि शिक्षा के लिए पैसे कभी भी बाधा नहीं बनेंगे । उन्होंने बताया कि 12वीं कक्षा में अच्छे नम्बर लाने के बाद उच्च स्तर की शिक्षा में खर्च होने वाले पैसे सरकार भरेगी।

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर बच्चों द्वारा निकाली गई पत्रिका ‘गुल्लक’ और प्रकाशित किये गये समाचार पत्र ‘नन्ही कलम से’ का विमोचन किया। उन्होंने ‘मिल बाँचे मध्यप्रदेश’ के पोर्टल का शुभारंभ भी किया। पोर्टल का शुभारंभ सात अगस्त को होगा।

‘गिफ्ट ए बुक अभियान’ का शुभारंभ

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर ‘गिफ्ट ए बुक अभियान’ का शुभारंभ किया। उन्होंने अभियान की शुरुआत करते हुए अपने निजी संग्रह से शासकीय उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय को कुछ किताबें भेंट की। यह शिक्षा विभाग की नई पहल है। इसका उद्देश्य समाज के सहयोग से शालाओं में लाइब्रेरी को समृद्ध बनाना है। समाज के प्रबुद्ध नागरिकों को बच्चों के उपयोग की किताबें दान करने के लिए प्रेरित भी किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने प्रोफेशनल लर्निंग कम्युनिटी पोर्टल और इसके अंतर्गत ई-लर्निंग मॉड्यूल का भी शुभारंभ किया। इन्हें शिक्षक और विद्यार्थी दोनों उपयोग कर सकते हैं।

स्कूल शिक्षा मंत्री कुंवर विजय शाह ने कहा कि स्कूली शिक्षा में नवाचारों के माध्यम से परिवर्तन लाते हुए शिक्षा में गुणवत्ता को बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। शासकीय शालाओं की गुणवत्ता निरंतर बढ़ रही है। स्कूल शिक्षा राज्य मंत्री श्री दीपक जोशी ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री चौहान के मार्गदर्शन में स्कूली शिक्षा में परिवर्तन आया है।

नन्ही प्रतिभाओं ने किया प्रभावित, मिला उपहार

मुख्यमंत्री को विद्यार्थियों की प्रतिभा ने इतना प्रभावित किया कि वे भी उन्हें सम्मानित करने में पीछे नहीं रहे। उन्होंने तत्काल मंच से ही उपहारों की घोषणा की। कहानी उत्सव में प्रथम आने वाले खंडवा के पाँचवी कक्षा के विद्यार्थी रामकृष्ण कान्हारे ने जब महादेव गोविंद रानाडे के जीवन से जुड़ी प्रेरणादायी कहानी सुनाई तो मुख्यमंत्री और अन्य अतिथि मंत्र-मुग्ध हो गये। कहानी सुनाने की शैली इतनी सम्मोहक थी कि मुख्यमंत्री ने कहानी समाप्त होते ही उसे गले लगा लिया और पुरस्कार स्वरूप 25 हजार रूपये की सम्मान राशि देने की घोषणा की। उन्होंने शाला छोड़ने वाले बच्चों को फिर से दाखिला लेने पर उत्साहवर्धन करते हुए उन्हें सम्मानित किया।

प्रारंभ में दृष्टि-बाधित बालिका फाल्गुनी और माडल स्कूल, भोपाल के विद्यार्थियों द्वारा ‘वंदे-मातरम’ की प्रस्तुति से भाव-विभोर होकर मुख्यमंत्री ने फाल्गुनी को ब्रेल लिपि का लैपटाप देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि फाल्गुनी मन की आँखों से दुनिया देखती- समझती है। उन्होंने ‘वंदे-मातरम्’ की प्रस्तुति में साथी बालिकाओं को 25 हजार की सम्मान निधि देने की भी घोषणा की ।

श्री चौहान ने पहली बार स्कूल में कदम रख रहे बच्चों को स्कूल बेग, पानी की बॉटल और स्टेशनरी का सेट भेंट कर उनके उज्जवल भविष्य की कामना की। उन्होंने राष्ट्रीय स्तर की खेल प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को भी सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने खेल-खेल में पढ़ाई करने के तरीकों पर आधारित प्रदर्शनी भी देखी

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