स्व-रोजगार योजनाओं से सफल व्यवसायी बन रहे युवा

प्रदेश में राज्य सरकार विभिन्न योजनाओं की मदद से युवाओं को स्वयं का व्यवसाय शुरू करने के लिये प्रोत्साहित कर रही है। इन युवाओं को ऋण के साथ-साथ सब्सिडी भी उपलब्ध करवाई जा रही है। आज ये युवा सफलतापूर्वक अपने व्यवसाय का संचालन कर रहे हैं और अन्य बेरोजगारों को भी रोजगार दे रहे हैं।

अशोकनगर जिला मुख्यालय निवासी देशराज बौद्ध का सपना था कि वे अपना स्वयं का व्यवसाय स्थापित करें। सपने को पूरा करने के लिये देशराज ने जिला अंत्यावसायी कार्यालय में आवेदन दिया। तमाम औपचारिकताओं के बाद देशराज को मॉडर्न फेब्रीकेशन यूनिट लगाने के लिये 12 लाख रुपये का ऋण मंजूर हुआ। उन्हें व्यापार शुरू करने के लिये विभाग की ओर से सब्सिडी भी उपलब्ध करवाई गई। अब देशराज नगर के बस-स्टैण्ड क्षेत्र में अपनी यूनिट में लोहे की जाली, दरवाजे, खिड़की और फर्नीचर का निर्माण कर रहे हैं। आज उनकी यूनिट में 5 अन्य जरूरतमंदों को भी रोजगार मिला है।

नीमच नगर की अम्बेडकर कॉलोनी निवासी राजकुमार ने मुख्यमंत्री स्व-रोजगार योजना से मिली मदद से सेनेट्री फिटिंग का कार्य शुरू किया है। राजकुमार पहले दूसरों के यहाँ छोटा-मोटा काम किया करते थे। इस कारण उन्हें आमदनी की हमेशा अनिश्चितता बनी रहती थी। इस संबंध में उन्होंने सरकारी कार्यालय में चर्चा की। उन्हें मुख्यमंत्री स्व-रोजगार योजना में 2 लाख रुपये का ऋण मंजूर हो गया। ऋण राशि के साथ उन्हें विभाग की ओर से सब्सिडी की राशि भी मिली। आज उनके व्यवसाय में 2 लोगों को और रोजगार मिल रहा है। राजकुमार बताते हैं कि स्वयं का व्यापार करने में जो संतोष मिलता है, वह नौकरी में नहीं मिल सकता।

नरसिंहपुर जिले में गोटेगाँव तहसील के ग्राम महगुंवा की कक्षा 8वीं तक शिक्षित परवीन अंजुम का परिवार पूरी तरह से मजदूरी पर ही निर्भर था। परवीन अपने परिवार की आर्थिक रूप से मदद करना चाहती थी। ऐसे में परवीन अंजुम ने स्व-सहायता समूह से जुड़कर गाँव में ही चिकन सेंटर खोलने का निर्णय लिया। परवीन को ग्रामीण आजीविका मिशन और मुख्यमंत्री स्व-रोजगार योजना से मदद मिली है। उन्हें 20 हजार रुपये की समुदाय निवेश राशि और एक हजार रुपये का रिवाल्विंग फण्ड दिया गया। इसके साथ ही, उन्हें एक लाख रुपये का ऋण भी मंजूर हुआ। आज उनका व्यापार अच्छा चल रहा है। अब गाँव में ही पोल्ट्री फार्म खोलने की कोशिश कर रही है। व्यापार अच्छा चलने से इनके परिवार की माली हालत में अप्रत्याशित सुधार आया है। अब परवीन अंजुमे अन्य महिलाओं को भी स्व-सहायता समूह से जुड़कर स्व-रोजगार शुरू करने की सलाह देती है।

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