स्वास्थ्य केंद्र में डाॅक्टर और एंबुलेस नहीं, बच्ची की मौत

टीकमगढ़ जिले के बड़ागांव धसान थाना क्षेत्र के वार्ड नंबर 8 में रहने वाली डेढ़ वर्षीय बच्ची की बुधवार दोपहर 3 बजे खेलत-खेलते पानी में डूब जाने से मौत हो गई। बच्ची को समय पर ईलाज और वाहन नहीं मिलने पर परिवार ने एक बेटी को खो दिया। परिजन बच्ची को लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बडागांव धसान पंहुचे। यहां पर एक भी डाॅक्टर भी नहीं मिला। जिस पर परिजन डाॅक्टर अंकित जैन के रूम पर बच्ची को लेकर पंहुचे। यहां बच्ची को जिला अस्पताल ले जाने की बात कही गई। जब डाॅक्टर से अस्पताल द्वारा साधन उपलब्ध कराने के लिये बोला तो एक घंटे इंतजार करने की बात कही गई। इस दौरान बच्ची की मौत हो गई।

उक्त घटना पर मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग ने स्वतः संज्ञान लेते हुये संचालक, स्वास्थ्य विभाग, भोपाल तथा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी जिला टीकमगढ़ से निम्नलिखित बिंदुओं पर तीन सप्ताह में तथ्यात्मक प्रतिवेदन मांगा है-

* किस चिकित्सक की ड्यूटी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बड़ागांव में घटना के समय थी ?
* चिकित्सक के उपस्थित ना होने क्या कारण था ?
* उक्त बिंदुओं पर जांच कराकर प्रतिवेदन आयोग को प्रेषित करने के निर्देश दिये गये है।

नाम परिवर्तन से नौ माह से परेशान किसान

शासकीय दस्तावेजों में होने वाली छोटी-छोटी त्रुटियों को सुधरवाने के लिए किसान महीनों तक परेशान होते है। वे खेती-किसानी का काम छोड़कर शासकीय कार्यालयों के चक्कर लगाते हैं लेकिन सुनवाई नहीं होती। ऐसा ही मामला सागर जिले की केसली तहसील में सामने आया है। जहां केवलारी कलां गांव निवासी किसान का नाम राजस्व रिकार्ड में चैन सींग कर दिया गया है।

चैन सींग का कहना है कि वे इस त्रुटि को सुधरवाने के लिए नौ महीने से तहसील कार्याल के चक्कर काट रहे हैं। उसे हर बार 15 से 20 दिन में पेशी पर बुलाया जाता है और अगली पेशी दे दी जाती है। नौ माह से केसली तहसील में तीन तहसीलदार बदल चुके हैं, लेकिन उसके नाम की त्रुटि नहीं सुधर पाई है। चैन सींग का कहना है कि सेंट्रल बैंक आॅफ इंडिया की टड़ा शाखा में उसके खाते में 19 सितम्बर 2020 को सोयाबीन फसल के नुकसान की बीमा राशि 66 हजार रूपये आयी थी। खसरा बी-1 में हुई गलती के कारण यह राशि आज तक नहीं निकल पाई है। बैंक जब भी जाओ तो वह भू-राजस्व पुस्तिका व खसरा बी-1 में अलग-अलग नाम होने पर राशि देने से इन्कार कर देते हैं।
उक्त मामले में स्वतः संज्ञान लेकर मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग ने कलेक्टर जिला सागर से तीन सप्ताह में तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी है।

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