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सुरखी उपचुनाव में विकास का मुद्दा, छह महीने में 500 करोड़ के काम कराने का दावा
मध्यप्रदेश में 28 विधानसभा क्षेत्रों में होने जा रहे उपचुनाव में से सागर जिले की सुरखी विधानसभा सीट पर भाजपा-कांग्रेस के बीच मुख्य मुकाबला है। सुरखी में छह महीने में करीब 500 करोड़ रुपए के विकास के काम शुरू करने का दावा कर रहे भाजपा प्रत्याशी और पूर्व मंत्री गोविंद सिंह राजपूत मतदाताओं के पास जा रहे हैं तो कांग्रेस प्रत्याशी पारुल साहू दलबदल कर सरकार गिराने के आरोपों से राजपूत को घेरते हुए जनता के बीच जा रही हैं।
गोविंद सिंह राजपूत और उनके परिवार के प्रति क्षेत्र में सकारात्मक वोट का परिदृश्य दिखाई दे रहा है क्योंकि वे विधानसभा क्षेत्र की जनता के सुख-दुख में साथ खड़े रहते हैं जबकि पारुल के बारे में कहा जाता है कि वे 2013 में चुनाव जीतने के बाद विधायक रहते हुए पांच साल जनता से दूर रही हैं। साथ ही कांग्रेस में टिकट की दावेदारी करने वाले अन्य नेताओं के टिकट कट जाने से उनकी नाराजगी का नकारात्मक वोट पारुल साहू के लिए महंगा साबित हो सकता है। कांग्रेस के कमजोर संगठन की वजह से भी पारुल साहू को नुकसान होने की संभावना है जबकि राजपूत को भाजपा के मजबूत संगठन का लाभ मिलने की संभावना से लोग इनकार नहीं कर रहे हैं। सुरखी उपचुनाव में भाजपा-कांग्रेस प्रत्याशियों के बीच कांटे की टक्कर के बीच फिलहाल गोविंद सिंह राजपूत का पलड़ा भारी नजर आ रहा है।




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