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सुरक्षा के बीच फल और सब्जी पहुंच रहे राजधानी में
आज से शुरू हुए किसानों के गांव बंद आंदोलन के दौरान शुक्रवार सुबह राजधानी और उसके आसपास के क्षेत्रों से पुलिस की सुरक्षा के बीच शहर में सब्जी और दूध पहुंचने लगा। फिलहाल स्थिति सामान्य नजर आ रही है। किसी भी स्थान से कोई अप्रिय समाचार नहीं हैं, लेकिन प्रदेश भर की पुलिस हाई अलर्ट पर है। शहर के सीमावर्ती इलाकों में जहां पुलिस की गश्त जारी है, वहीं मंडी में अच्छी खासी मात्रा में पुलिस बल मौजूद है।आम दिनों की तरह भोपाल मंडी में आवक कमजोर तो रही, लेकिन यहां पहुंचने वाले किसानों की संख्या बेहद कम थी। अल-सुबह तो दूध और सब्जी वालों को आंदोलनकारी किसानों द्वारा कहीं रोकने का प्रयास नहीं किया गया। माह का प्रथम दिन होने से थोक मंडी बंद रही।
भोपाल और उसके आसपास के इलाकों में फिलहाल हालात सामान्य है, प्रशासन द्वारा एहतियात के तौर पर पहले ही कड़े इंतजाम कर रखे हैं। इसके अलावा पूर्व में ग्रामीणों पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की बैठक हो चुकी है। जिसमें ग्रामीणों ने भरोसा दिलाया था कि वह किसी भी प्रकार के आंदोलन का हिस्सा नहीं लेंगे। सुरक्षा सहित तमाम मुद्दों पर पूर्व में ही पुलिस के साथ गांव के लोग सकारात्मक चर्चा कर चुके थे। ग्रामीणों से मिले आश्वासन से पुलिस को भी काफी राहत मिली थी।
हालात पर पैनी नजर : पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी हालात पर पैनी नजर बनाए हुए हैं। किसान नेताओं की गतिविधियों के साथ ही मंडी में होने वाली हर गतिविधि वह वह नजर रखे हुए हैं। ताकि समय रहते किसी भी स्थिति से निपटा जा सके।
दूध का वितरण जारी : हड़ताल के बाद भी शहर के कई इलाकों में बेरोक-टो दूध का वितरण जारी है। हालांकि शहर में आम दिनों की अपेक्षा कम दूध विक्रेता ही गांवों से पहुंचे हैं। जिसके कारण दूध की किल्लत हो सकती है।
उपभोक्ताओं ने किया स्टॉक : यूं तो सब्जी और दूध को लम्बे समय के लिए स्टॉक नहीं किया जा सकता, लेकिन किसान आंदोलन को देखते हुए लोगों ने हफ्ते भर की सब्जी का स्टॉक कर लिया। वहीं दो-तीन दिन का दूध का स्टॉक भी लोगों ने कर रखा है। आंदोलन लम्बा चलता है तो आने वाले दिनों में शहरवासियों को सब्जी और दूध के लिए परेशान होना पड़ सकता है।
सब्जी के दाम आसमान पर : किसान आंदोलन के मद्देनजर फल-सब्जी की कमी को देखते हुए लोगों ने जैसे ही इनका स्टॉक शुरू करने के लिए इनके दाम बढ़ गए। सब्जियों के दाम आसमान पर पहुंच गए। क्योंकि जोखिम उठाकर बाजार में सब्जी लाने वाले किसान भी अपनी सब्जियों और फलों का भरपूर दाम चाहते हैं।
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