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सियाचिन में जिंदगी को मात देने वाले लांस नायक हनुमनथप्पा ने प्राण त्यागे
मद्रास रेजीमेंट की 19 वीं बटालियन के लांस नायक हनुमनथप्पा ने आज मध्यान्ह पौने बारह बजे अंतिम सांस ली। सियाचिन में 20500 फीट ऊंची बर्फीली सीमा पर देश की रक्षा करते समय 35 फीट के बर्फ के सफेद कफन में छह दिन तक मौत को मात देने वाले हनुमनथप्पा के लिए देश के लोगों की दुआएं, प्रार्थनाएं की जा रही थीं मगर देश के इस वीर का निधन हो गया।
हनुमनथप्पा अपने नौ अन्य साथियों के साथ तीन फ रवरी को सियाचिन में देश की सीमा पर जब पहरा दे रहे थे तभी बर्फीले तूफान ने सभी दस जवानों को अपने अगोश में ले लिया। एक रेडियो मैसेज से सेना को इसकी जानकारी लगी तो सर्चिंग के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन चला। छह दिन बाद 35 फीट नीचे तक बर्फ हटाने पर हनुमनथप्पा जीवित हालत में मिले तो उन्हें दिल्ले के आर्मी अस्पताल लाया गया। यहां डॉक्टरों की टीम ने उनका इलाज शुरू किया लेकिन उनकी हालत में विशेष सुधार नहीं हो पा रहा था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी हनुमनथप्पा को देखने आर्मी अस्पताल पहुंचे थे और देशभर में हनुमनथप्पा के जीवन के लिए प्रार्थनाएं की जा रही थीं।
शहीदों को भी श्रद्धांजलि
सियाचिन के बर्फीली तूफान में हनुमनथप्पा के अलावा अन्य शहीदों में महेशना पीएन, इलुमलाई एम, गणेशन जी, सुधीश बी, नागेश टीटी, सूर्यवंशी एसवी, मुश्ताक अहमद, रामा मूर्ति एन और एस कुमार हैं।




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