सिद्धा समारोह में बुन्देली गायन एवं आद्या नृत्य नाटिका की प्रस्तुति हुई

शारदीय नवरात्रि के अवसर पर जनजातीय लोक कला एवं बोली विकास अकादमी द्वारा देवी के विविध रूपों को प्रदर्शनकारी कला विधाओं के साथ समवेत करते हुए तीन दिवसीय सिद्धा समारोह का आयोजन जनजातीय संग्रहालय भोपाल के मुक्ताकाश मंच पर किया गया है। 07 से 09 अक्टूबर, 2021 तक आयोजित समारोह में देवी के 108 स्वरूपों में से आद्या स्वरूप को भरतनाट्यम शैली में, दुर्गा स्वरूप को गणगौर और कथक शैली और जया स्वरूप को बुन्देली एवं समकालीन नृत्य विधाओं पर केन्द्रित कर नृत्य नाटिकाओं के माध्यम से तथा इसके साथ ही देवी की महिमा के गान को बुन्देली, बघेली और निमाड़ी बोली में संयोजित किया गया है। समारोह के पहले दिन आद्या स्वरूप को भरतनाट्यम शैली में भरतनाट्यम नृत्यांगना एवं गुरू डॉ. मंजू मणि हतवलने के निर्देशन में प्रस्तुति दी गई।

प्रस्तुति की शुरूआत आद्या नृत्य नाटिका से हुई। प्रस्तुति में बताया कि उमा या दुर्गा का एक नाम आद्या है। प्रलय के अंत होने के बाद आदि में यही देवी प्रादुर्भूत हुई थीं। आद्या उस पराशक्ति की कथा है जो इस संसार की उत्पत्ति के पहले भी विद्यमान थीं। उस पराशक्ति ने रूपरहित होते हुए भी एक रूप धारण किया और अपने तेज से एक पुरूष की रचना की जिसे तीन गुणों – सतोगुण, रजोगुण और तमोगुण (ब्रम्हा, विष्णु एवं महेश्वर ) में विभाजित कर इस सृष्टि की संरचना का कार्य सौंपा। जिसमें ब्रम्हा को सृष्टि की संरचना, विष्णु को सृष्टि का संचालन एवं महेश्वर को समय आने पर सृष्टि के विनाश का दायित्व दिया गया। देवी आद्या ही स्वेच्छा से इनकी अर्धांगिनी के रूप में आती हैं एवं इस सृष्टि के विस्तार में सहयोग करती हैं ।प्रस्तुति का आलेख विनय उपाध्याय, प्रकाश परिकल्पना कार्तिक नामदेव, वेशभूषा, रूपसज्जा एवं मंच सज्जा विशाल हतवलने द्वारा की गई।

दूसरी प्रस्तुति की शुरूआत दीपा श्रीवास्तव और साथियों द्वारा बुन्देली गायन में भगवान गणेश जी के भजन हरी-हरी दूबा में खेले गजानन…, से की गई। इसके बाद माता के जस और भजनों की प्रस्तुति दी। जिसमें बुंदेलखण्ड में देवी विंध्यवासिनी को समर्पित गीत कैसी बिकट पहाड़न पर ओ जगदम्बे मैया…, मैया के धौरे दोई कर जोरे तिरिया बचन सुनाए, महारानी खोलो किवड़िया…, मैं कौन बहाने आऊं मैया तौर दर्शन को…, नंदनवन में नंदन वन फुलवा बीनो मोरी माय…, मैं कौन बहाने आऊ मैया तौर दर्शन को…,एवं अंत में लांगुरिया गीत केला मैया के भवन में घुटवन खेले लांगुरिया, खेले लांगुरिया…, गाकर माहौल को भक्तिभय कर दिया। मंच पर हारमोनियम पर उस्ताद सलीम अल्लहवाले, ढोलक पर उस्ताद साबिर खान, हैंड सोविन पर समी आल्लहा वाले, ऑर्गन पर सौलत अल्लाह वाले एवं कोरस में नंदिनी श्रीवास्तव एवं मुक्ता प्रखर ने संगत की।

समारोह के दूसरे दिन 8 अक्टूबर को भोपाल की शीला त्रिपाठी और साथियों द्वारा बघेली भक्ति गायन एवं बड़वाह के संजय महाजन और साथियों द्वारा गणगौर और कथक शैली में दुर्गा नृत्य नाटिका की प्रस्तुति दी जाएगी। 

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