शारदीय नवरात्रि के अवसर पर जनजातीय लोक कला एवं बोली विकास अकादमी द्वारा देवी के विविध रूपों को प्रदर्शनकारी कला विधाओं के साथ समवेत करते हुए तीन दिवसीय सिद्धा समारोह का आयोजन जनजातीय संग्रहालय भोपाल के मुक्ताकाश मंच पर किया गया है।
समारोह में देवी के 108 स्वरूपों में से आद्या स्वरूप को भरतनाट्यम शैली में, दुर्गा स्वरूप को गणगौर और कथक शैली और जया स्वरूप को बुन्देली एवं समकालीन नृत्य विधाओं पर केन्द्रित कर नृत्य नाटिकाओं के माध्यम से तथा इसके साथ ही देवी की महिमा के गान को बुन्देली, बघेली और निमाड़ी बोली में संयोजित किया गया है। समारोह के दूसरे दिन आज शीला त्रिपाठी और साथियों द्वारा बघेली भक्ति गायन एवं बड़वाह के संजय महाजन और साथियों द्वारा गणगौर एवं कथक शैली में दुर्गा नृत्य नाटिका की प्रस्तुति दी गई। जिसका प्रसारण संग्रहालय के यूट्यूब चैनल https://youtu.be/J4CLpolAIA8 और फेसबुक पेज https://www.facebook.com/events/407901940946835/?sfnsn=wiwspwa पर लाइव प्रसारित किया गया।
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