-
दुनिया
-
US-INDIA ट्रेड डील के खिलाफ MODI पर जमकर बरसे RAHUL, बताया EPSTEIN फाइलों की धमकियों का दबाव
-
अकेले रहने वाले बुजुर्गों को टारगेट कर रहे Cyber ठग, Gwalior में 90 साल Couple शिकार
-
Indian क्रिकेट के सूरमाओं का सरेंडर, Super 8 के पहले मैच में करारी हार
-
अमेरिकी TRADE DEAL के खिलाफ INC आंदोलन की तैयारी, RAHUL GANDHI व खड़गे की उपस्थिति में BHOPAL में पहला किसान सम्मेलन
-
फिर Political माहौल की गर्मा गरमी के बीच बेतुका फैसला, MP कांग्रेस के प्रवक्ताओं की छुट्टी
-
साधन और सुविधाओ से आसान हुई निर्वाचन प्रक्रिया
मध्यप्रदेश के गठन के बाद के वर्षों में लोकसभा एवं विधानसभा चुनाव प्रक्रिया को सम्पन्न करवाने के लिए साधन सीमित और कम संख्या में थे। जहाँ वाहनों की कमी थी, तो संचार व्यवस्था भी उतनी पुख्ता नहीं थी, जितनी अस्सी और नब्बे के दशक के बाद हो सकी। मत-पेटियों में मतदान करवाने के बाद मतगणना में वोटों की गिनती में काफी समय लगता था। मतदाता-सूची को हार्ड कॉपी में रखना और सहेजना मुश्किल था। भारत निर्वाचन आयोग से जानकारी डाक अथवा टेलीफोन के जरिये प्राप्त होती थी। मतदाताओं को मतदान में भाग लेने के लिये प्रेरित करने वाले साधन भी सीमित थे।सूचना प्रौद्योगिकी के विस्तार के साथ आधुनिक नवीनतम टेक्नालॉजी का भी उपयोग होने लगा। भारत निर्वाचन आयोग की सार्थक पहल का ही परिणाम है कि निर्वाचन प्रक्रिया में सूचना प्रौद्योगिकी के साथ नवीन टेक्नालॉजी को भी त्वरित गति से अपनाया गया। आयोग द्वारा अपनाये गये नवाचारों से आज मध्यप्रदेश में निर्वाचन प्रक्रिया सरल, पारदर्शी और निष्पक्ष हो गई है। वोटर-लिस्ट में नाम ज़ुड़वाने की ऑफलाइन के साथ ही ऑनलाइन सुविधा भी मतदाताओं के लिये सुलभ है। फोटोयुक्त मतदाता-सूची में नाम, विधानसभा क्षेत्र और मतदान-केन्द्र की जानकारी भी सर्च की जा सकती है। मतदाताओं के सहयोग के लिये राष्ट्रीय-स्तर की हेल्पलाइन 1950 टोल-फ्री नम्बर एवं शिकायत निवारण पोर्टल भी उपलब्ध है।
मतदाताओं की सुविधा के लिये सभी 230 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र मुख्यालय और राज्य-स्तर पर मतदाता सहायता केन्द्र, दिव्यांगों के लिये ब्रेल-लिपि में डमी मतपत्र, मतदान केन्द्रों की सुविधाओं में विस्तार, मतदाता-जागरूकता के लिये स्वीप यानि सिस्टेमेटिक वोटर एजुकेशन एण्ड इलेक्ट्रोरल पार्टिसिपेशन की गतिविधियों का संचालन, सी.सी. टी.व्ही. कैमरें, वीडियोग्राफी, टेलीविजन जैसे साधनों का उपयोग, सोशल मीडिया आदि ऐसे अनेक नवाचार अपनाये गये, जिससे निर्वाचन प्रक्रिया न सिर्फ आसान, बल्कि जन-जन तक पहुँच सकी।
नवाचारों में सबसे अहम और महत्वपूर्ण कड़ी ईव्हीएम रही, जिसका उपयोग मध्ययप्रदेश में सबसे पहले वर्ष 2003 के विधानसभा चुनाव में हुआ। आयोग ने मतदान प्रक्रिया को और निष्पक्ष बनाने के लिये वर्ष 2017 से चुनावों में वीवीपेट का इस्तेमाल करना शुरू किया है। इस साल होने वाले विधानसभा और अगले वर्ष के लोकसभा चुनावों में भी वीवीपैट का उपयोग होगा। देशभर के निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों को आपस में जोड़ने के लिये ईआरओ नेट की शुरूआत भी की गई है।
इसी साल 2018 में चुनाव आयोग अनेक नवाचारों के साथ सामने आया है। ऐसे सॉफ्टवेयर अपनाये गये हैं, जिनसे निर्वाचन कार्य एवं चुनाव की तैयारियों को और आसान बना दिया गया है। वोटर लिस्ट की त्रुटियों में सुधार के लिए भी सॉफ्टवेयर का उपयोग सफल हुआ है। कुल मिलाकर चुनाव प्रक्रिया अब हाईटेक हो चुकी है। आदर्श आचरण संहिता के उल्लंघन की शिकायत “सी-विजल” एप के माध्यम से की जा सकेगी। गोपनीय शिकायत के लिए “सीजीएस” सिटीजन ग्रीवेंस सर्विस एप की शुरूआत की गई है। उम्मीदवारों के नामांकन पर्चे भरने के लिए ऑनलाइन व्यवस्था की गई है। इसके लिए जेनासेस एप का इस्तेमाल होगा। विधानसभा चुनाव आई.टी. एप्लीकेशन “समाधान, सुविधा और सुगम एप के सहयोग से करवाने की तैयारी है। तीनों के उद्देश्य अलग-अलग है। विधानसभा चुनाव में इस्तेमाल होने वाले 7 एप की भूमिका महत्वपूर्ण साबित होगी।
लोकतंत्र के इस उत्सव में नवाचारों ने जब निर्वाचन प्रक्रिया को नई दिशा दे दी है तो आइये हम भी संकल्प करें कि हम मतदान अवश्य करेंगे।




Leave a Reply