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सवा सौ साल पुरानी छतरपुर की रामलीला में धनुष यज्ञ, धनुष टूटते ही गूंजी परशुराम की आवाज
छतरपुर में सवा सौ साल पुरानी रामलीला में शनिवार और रविवार को अहिल्या उद्धार से लेकर लक्ष्मण-परशुराम संवाद का मंचन देखकर दर्शक की श्रद्धा देखते ही बनी। रविवार को महाआरती और जनसहयोग रसोई के आयोजन में नगर के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
छतरपुर नगर के महलों के पास बने भव्य मंच पर चल रही श्री कड़क्का रामलीला में शनिवार को अहिल्या उद्धार, नगर दर्शन और पुष्प वाटिका लीला का एवं रविवार को धनुष यज्ञ, रावण-वाणासुर संवाद, लक्ष्मण-परशुराम संवाद की लीला का कलाकारों ने सजीव मंचन किया। शनिवार की महाआरती जनसहयोग रसोई के वरिष्ठ पत्रकार एवं छतरपुर भ्रमण के संपादक हरि अग्रवाल, भोलू अग्रवाल और रमेश खरे ने की। वहीं रविवार की महाआरती उज्जैन इस्कॉन मंदिर के बृजेन्द्र प्रभु जी, शंकर लाल सोनी आदि ने की।
नारी से शिला बनी अहिल्या का उद्धार
प्रथम दिन की आरती के उपरांत कलाकारों ने अहिल्या उद्धार, नगर दर्शन और पुष्प वाटिका लीला का मंचन किया। इसके बाद गौतम ऋषि के श्राप से नारी से शिला बनी अहिल्या का उद्धार किया। पत्थर पर जैसे भगवान श्री राम ने पैर रखा तो श्रापित अहिल्या फिर से नारी रूप में प्रकट हुई। ऋषि विश्वामित्र के साथ राम लक्ष्मण जनकपुर पहुंचे। राजा जनक ने मुनिवर विश्वामित्र व राम का स्वागत सत्कार किया। जहां पूजा के लिए जनक की पुष्प वाटिका में पुष्प चुनने के लिए राम व लक्ष्मण गए। वहां दोनों भाइयों को देख नगरवासी आनंदित हुए। उसी समय मां पार्वती की पूजन करने सीता जी ने भगवान राम को देख मोहित हुई। उन्होंने पति के रूप में पाने के लिए मां गौरी का पूजन किया। रविवार की आरती के उपरांत कलाकारों ने धनुष यज्ञ, रावण-वाणासुर संवाद, लक्ष्मण-परशुराम संवाद की लीला का मंचन किया, प्रभु श्रीराम चंद्र द्वारा धनुष तोड़कर सभी राजाओं का मद चूर करने और माता जानकी द्वारा वरमाला पहनाए जाने का मार्मिक प्रसंग का मंचन किया गया। जिसे देखकर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो गए।
स्वयंवर में शिव धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाने की शर्त
राजा जनक ने सीता विवाह की शर्त रखी थी कि जो कोई शिव धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाएगा उसी के साथ सीता का विवाह होगा। आयोजित स्वयंवर में कई देशों के नरेश व राजकुमार आए। यहां तक कि राजा रावण भी धनुष यज्ञ में अपना दांव आजमाने आया और भगवान भक्त बाणासुर पहुंचे। रावण-बाणासुर संवाद के शंखनाद से देश के राजा थर्रा उठे। रावण के जाने के बाद देश देश के राजाओं ने धनुष उठाने का प्रयास किया। राजा जनक ने अपने संताप स्वर में कहा, मैं अगर जानता की यह धरती वीरों से खाली पड़ी है तो मैं इतना बड़ा प्रण नहीं करता। जिसे सुनकर लक्ष्मण क्रोधित होकर बोले की विद्वान मंडली में मेरा बोलना अनुचित है लेकिन अनुचित वाणी सुनकर मौन रहना भी पाप है। जनक के संताप को दूर करने के लिए गुरु की आज्ञा पाकर श्रीराम ने जैसे धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाई और धनुष टूट गया। माता सीता ने राम को वरमाला पहनाई। धनुष टूटने की आवाज सुनकर परशुराम राजा जनक के दरबार पहुंचे और लक्ष्मण-परशुराम संवाद का मंचन हुआ।
रामलीला में कौन निभा रहा किस पात्र की भूमिका
आपको बता दें कि रामलीला में गणेश जी का अभिनय यश पटैरिया, रामजी अंकित चतुर्वेदी, लक्ष्मण देवांश चतुर्वेदी, वाणासुर आशुतोष चतुर्वेदी, रावण हर्षदीप शर्मा, जनक एलपी कुशवाहा, पेटू राज विनोद मिश्रा, मंत्री रमेश उपाध्याय, राजा सीताराम चौबे, परशुराम अमन रावत, सीता का किरदार सत्यम दुबे निभा रहे हैं।




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