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सरकार की पहल पर पूर्व केंद्रीय मंत्री चिंदबरम ने सशर्त दिया समर्थन
यूपीए सरकार के वित्त मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता पी चिदंबरम ने कहा कि सरकार ने 1000-500 के उच् मूल्य वर्ग के नोटों को बंद कर यह ठहराने की कोशिश की है कि इससे काले धन पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी और अगर सरकार के इस निर्णय से कालेधन को बाहर निकालने और समाप्त करने व आने वाली पीढ़ी को बचाने से जुड़ा है तो इसका कांग्रेस समर्थन करेगी। मगर कांग्रेस का यह भी कहना है कि सरकार के इस फैसले को निर्विवाद तथ्यों व आंकड़ों की पृष्ठभूमि में देखा चाहिए।
सरकार के निर्णय को निर्विवाद तथ्यों और आंकड़ों की पृष्ठभूमि में देखा जाना चाहिए।
1. 1978 में जनता पार्टी की सरकार ने उच्च मूल्य वर्ग के नोटों को चलन से बाहर किया था। यह कार्रवाई अपने उद्देश्यों को हासिल करने में हर तरह से नाकाम साबित हुई। बाद में उच्च मूल्य वर्ग के नोट जल्द ही फिर से शुरु किये गये और बेहिसाब धन और सम्पत्ति में वृद्धि हुई।
2. प्रचलन में रहे 500 और 1000 रुपये के नोटों का कुल मूल्य सभी तरह के नोटों के कुल प्रचलन का लगभग 86.4 प्रतिशत है। उन सभी नोटों को वापस ले लिया जाएगा। यदि कोई व्यक्ति नोट पेश करता है तो उसे बदला जाना चाहिए। सरकार ने व्यावहारिक रूप से स्वीकार किया है कि उन्हें छोटे मूल्य वर्ग के नोटों (100 50, 20, 10, 5, 2 रुपये और 1) से नहीं बदला जा सकता। इसलिए, 500 रुपये और 2000 रुपये और, शायद 1000 रुपये के भी उच्च मूल्य वर्ग के नोटों की एक नयी श्रृंखला शुरु करने का फैसला किया गया है। अंतत:, केवल पुराने नोटों जो कानूनी तौर पर नए नोटों से बदले नहीं जा सकेंगे वे ही वास्तव में प्रचलन से बाहर होंगे। इनकी कीमत कितनी होगी, वो अभी अनिश्चित है और इसके बारे में पता नहीं है। विमुद्रीकरण की सफलता की असली परीक्षा होनी बाकी है।
3. शुरु होने वाले नये नोटों की श्रृंखला की अनुमानित कीमत 15,000 से 20,000 करोड़ रुपये है। इसलिए, विमुद्रीकरण का आर्थिक लाभ कम से कम इस धनराशि के बराबर होना चाहिए।
4. नये नोटों से पुराने नोटों को बदलने का काम जल्दी, कुशलतापूर्वक और आम लोगों को कम से कम असुविधा के साथ, विशेष रूप से गरीब, मध्यम वर्ग, किसानों, दिहाड़ी मजदूर, छोटे व्यापारियों और व्यवसायियों, छात्रों, स्वरोजगार और आम गृहिणी की सुविधा के लिये किया जाना चाहिए क्योंकि इनमें से हर एक के पास उच्च मूल्य वर्ग के कम ही नोट होंगे। इस फैसले का क्रियान्वयन सरकार और बैंक कितनी अच्छी तरह कर पाते हैं यह परीक्षण का विषय होगा।
5. 40 साल पहले 500 रुपये का एक नोट उच्च मूल्य वर्ग का नोट था। आज, 500 रुपये के नोट को उच्च मूल्य वर्ग के नोट के रूप में माने जाने पर संदेह हो सकता है। बीच की अवधि में मुद्रास्फीति को सभी को ध्यान में रखना चाहिए। 500 रुपये का नोट व्यापक रूप से परिचालित और उपयोग किया जाता है। यही कारण है कि मुझे लगता है कि सरकार के पास इसे फिर से शुरु करने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। अगर बड़ी मात्रा में पुराने 500 रुपये के नोट को कानूनी तौर पर नये नोट से बदला जाता है तो इस बेकार की कवायद से क्या हासिल होगा?
6. 2000 रुपये के नये नोट की शुरुआत पहेली की तरह है। इस कदम से काले धन के सृजन को रोकने में कैसे मदद मिलेगी? यदि नयी आय या धन बेहिसाब है, तो क्या वो आय या धन 2000 रुपये के नोट में छिपायी नहीं जायेगी? उच्च मूल्य वर्ग के नोट का विमुद्रीकरण उससे ज्यादा उच्च मूल्य वर्ग के नये नोट को जारी करके कैसे होगा? सरकार को इस पहले का हल साफ समझाना चाहिए।
7. सरकार के निर्णय के आर्थिक ज्ञान का तीन मानकों पर परीक्षण किया जायेगा-
(क) सकल घरेलू उत्पाद के अनुपात में उपस्थित मौजूदा नकद 12 प्रतिशत है। क्या यह वैश्विक स्तर यानि लगभग 4 फीसदी के औसत से नीचे आयेगा?
(ख) उच्च मूल्य वर्ग के मौजूदा प्रचनन वाले नोटों की कीमत लगभग 15 लाख करोड़ रुपये है। क्या यह कीमत काफी नीचे आयेगी?
(ग) क्या सोने का आयात बढ़ना यह दर्शाता है कि बेहिसाब आय/धन को बुलियन और सोने के आभूषण के रूप में छिपाया जा सकता है?




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