मध्यप्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष गिरीश गौतम ने कहा है कि ईश्वर ने पत्रकारों को संवेदनशीलता एवं अभिव्यक्ति की विशेष क्षमता प्रदान की है। इस कारण से पत्रकारों को समाज में मार्गदर्शक की भूमिका प्राप्त है। पत्रकार को अपनी लेखनी का उपयोग समाज की समस्याओं और विसंगतियों को सामने लाने में करना चाहिए, पत्रकार को सही मायने में समाज की वेदना का प्रवक्ता बनना चाहिए। श्री गौतम ने बुधवार को सेंट्रल इंडिया प्रेस क्लब द्वारा आयोजित राजधानी पत्रकारिता महोत्सव 2021 में ‘ उत्तर कोरोना काल – एक विचार मंथन, मीडिया जगत के समक्ष चुनौतियां और उनका समाधान विषय पर अपने विचार व्यक्त करते हुए यह बात कही।
श्री गौतम ने कहा कि पिछले वर्ष विश्व में एक ऐसी आपदा आई जिसके शत्रु की पहचान हम किसी आकार के रूप में नहीं कर सकते है। उसका मुकाबला करने के लिए सभी स्तरों पर प्रयास हुए, जिसमें पत्रकारिता जगत भी शामिल है। पत्रकारों से कोरोना काल में कोराना योद्घा की तरह कार्य किया है।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र के तीन स्तंभ तभी मजबूत है जबकि चौथा स्तंभ यानि पत्रकारिता निष्पक्ष एवं लोककल्याण को ध्येय में रखकर कार्य करे। कई पीढि़यों के अंतराल में पत्रकारिता का स्वरूप भी बदला है। नई तकनीकी ने इसे फार्म में भी बदलाव किया है। श्री गौतम ने कहा कि हम सभी को मिलकर वर्तमान में सामने आ रही समस्याओं के निराकरण की दिशा में कार्य करना चाहिए। आज अभिव्यक्ति की दक्षता पर भी असर पड़ रहा है, इस कारण कुछ पत्रकार निष्पक्ष रूप से कार्य करने में समर्थ नहीं हैं। पत्रकारों को सामाजिक चेतना जागृत करने का कार्य करने का दायित्व है।
श्री गौतम ने कहा कि हमारे यहां लिबरल डेमोक्रेसी की अवधारणा बनने लगी है। इसमें लोग बिना कर्तव्य के अधिकार चाहते हैं। जबकि लोकतंत्र का वास्तविक अर्थ है कर्तव्य के साथ अधिकार हो, यह जो अंतर है उसके कारण आज गड़बडि़यां सामने आ रही है। पत्रकारों का यह दायित्व है कि इन गड़बडि़यों को सामने लाए और समाज के सभी उत्तरदायी अधिकारों के साथ अपने कर्तव्य को भी समझें।
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