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संस्कृत भाषा की पुनर्स्थापना का उपयुक्त समय: गौतम
मध्यप्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष गिरीश गौतम ने कहा है कि संस्कृत भाषा हमारी संस्कृति एवं भारतीय वैभव का प्रतीक है। आज इस भाषा के पुनर्स्थापना के लिए सबसे उपयुक्त समय है, हम सभी राष्ट्रवासियों को अपना दायित्व समझ कर संस्कृत भाषा के पुनरउत्थान की दिशा में कार्य करना चाहिए। विधानसभा अध्यक्ष गौतम संस्कृत भारती द्वारा आयोजित संस्कृत सप्ताह के समापन कार्यक्रम में मुख्यअतिथि के रूप में अपने विचार व्यक्त कर रहे थे।
श्री गौतम ने इस अवसर पर कहा कि आज हमें इतिहास के उस कालखण्ड को गंभीरता से देखने की जरूरत है जब संस्कृत भाषा आमजन से दूर होती चली गई। इस बात पर भी विचार की जरूरत है कि वो कौनसे कारण और कारक थे जिसके कारण संस्कृत आमजन की बोलचाल से दूर हो गई और इसे हमने देवों की भाषा बना दिया। दूसरी भाषा का प्रभाव हम पर पड़ा और संस्कृत जैसी महान भाषा विलुप्ति की कगार पर जा पहुंची। वे भाषाएं संस्कृत से समृद्ध और सशक्त तो कतई नहीं हैं, लेकिन हम अपनी भाषा का संरक्षण नहीं कर पाए और इसके चलते दूसरी भाषाओं का प्रसार बढ़ गया।
संस्कृत को पुनस्र्थापित करने की जरूरत है। संस्कृत भारती इस दिशा में अच्छा कार्य कर रही है। श्री गौतम ने इस बात पर बल दिया कि आमजन को कम से कम संस्कृत का इतना ज्ञान तो होना चाहिए कि वह वैदिक पूजा एवं संस्कारों के द्वारा पंडितजी द्वारा पढ़े जा रहे मंत्रों का अर्थ समझ कर उन्हें अपने जीवन में आत्मसात कर सके।




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