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संस्कृति विभाग के तत्वावधान में ऑनलाइन मुशायरा
मध्यप्रदेश उर्दू अकादमी संस्कृति परिषद संस्कृति विभाग के तत्वावधान में दो दिवसीय ऑनलाइन मुशायरा आयोजित किया गया। मुशायरे के दूसरे दिन प्रदेश के विभिन्न शहरों से 11 शोअरा एवं शायरात अपना कलाम पेश किया।
अकादमी की निदेशक डॉ नुसरत मेहदी ने ऑनलाइन मुशायरे के आयोजन का उद्देश्य बताते हुए कहा कि उर्दू अकादमी प्रदेश के साहित्यकारों, कलाकारों और शायरों के फ़न और सृजनात्मकता को मंच उपलब्ध कराने की दिशा में निरंतर प्रयास रत है। चूंकि इस समय केवल ऑनलाइन कार्यक्रम ही आयोजित किये जा सकते हैं अतः मुशायरों की परम्परा को भी इसी तरह जारी रखने का प्रयास किया जा रहा है।मुशायरे में जिन शायरों ने अपना कलाम पेश किया उनके मुंतख़बअशआर इस प्रकार हैं।
नूर मोहम्मद यास – भोपाल- फूलों ने चौखटे से लिपटते हुए कहा तस्वीर इस क़दर तो न बैजान थी कभी
निसार मालवी-विदिशा
लबे इज़हार तक आने नहीं पाते जो कभी वो फ़साने ही तो मशहूर हुआ करते हैं।
आरिफ अली आरिफ़- भोपाल- बिन तुम्हारे शाख़ से टूटा हुआ पत्ता हूँ मैं ज़िक्रे माज़ी ही रहा ना फ़िक्रे आइंदा हूँ मैं।
नूर उज्जैनी- उज्जैन- सिलसिला रोज़ नया चाहता है कौन अब किसका भला चाहता है
रशीद इमकान – उज्जैन- ख़ुदकुशी की ही नहीं मेरे किसी दुश्मन ने आगे बढ़ कर ही मैं ख़ुद हाथ कटा लेता हूँ
पंकज पलाश – शाजापुर- ख़ुदा की ज़ात ने बख्शी है मुझको इश्क़ की ख़ुशबूबिरहमन होके मुझको आशिक़े उर्दू बनाना था।
ख़ुर्शीद अन्वर-उज्जैन- न लौटें वक़्त पर बच्चे तो ये माँ बाप से पूछो हो चाहे मख़मली बिस्तर उन्हें क्या नींद आती है।
ख़ालिदा सिद्दीक़ी- भोपालअसर दिखाएगी जब इन्तिज़ार की सूरत ख़ुदा ने चाहा तो देखेंगे यार की सूरत
सीमा नाज़ – भोपालहमने बख्शा है इन आईनों को एहसासे जमाल हम न होंगे तो ये आईने किधर जायेंगे। मुशायरे का सफ़ल संचालन उर्दू अकादमी की निदेशक डॉ. नुसरत मेहदी ने किया।




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