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संवेदना के धरातल पर श्यामची आई
भोपाल में जनजातीय संग्रहालय में शनिवार की शाम उत्कृष्ट फिल्मों के पुनरावलोकन की श्रृंखला ‘सिने आस्वाद” के अन्तर्गत राष्ट्रीय पुरस्कार प्रा’त फिल्म ‘श्यामची आई” का प्रदर्शन किया गया।
श्यामची आई वह पहली मराठी फिल्म है, जिसे नेशनल अवार्ड मिला था। साने गुरुजी के उपन्यास पर आधारित यह फिल्म एक विद्वान और ज्ञानी व्यक्ति का अपनी माँ की स्मृति में तैयार किया हुआ एक कालजयी दस्तावेज है। उल्लेखनीय है कि जितना प्रसिद्ध यह उपन्यास हुआ था, उतनी ही ज्यादा प्रतिष्ठा फिल्म को भ्ाी मिली। यह फिल्म एक पात्र जिसका नाम श्याम है, जो कि छोटा बच्चा है, उसकी अपनी मां के साथ बचपन की स्मृतियों का एक अेसा ताना-बाना बुना गया है, जो अनेक कठिनाइयों, मुश्किलों एवं विषमताओं के बावजूद परिवाररूपी संस्था और उसकी गरिमा की रक्षा करने वाली एक महान स्त्री की दास्तां के रूप में व्यक्त होती है।
अभ्ािनेत्री वनमाला के यादगार अभ्ािनय के लिए इस फिल्म को जाना जाता है। फिल्म के अन्य कलाकारों में माधव वझे, दामू अन्न्ा जोशी, सुमति गु’ते, सरस्वती बोडस और बाबूराव पंेढारकर शामिल हैं। यह फिल्म अनेक सुमधुर गाने के कारण भ्ाी जानी जाती है। इसका निर्देशन पी।के। अत्रे ने किया था। यह फिल्म अंग्रेजी में उपशीर्षकों के साथ प्रदर्शित की गई, जिसे बड़ी संख्या में देखने दर्शक पधारे थे।




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