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संजीव चतुर्वेदी और अंशु गुप्ता को मैगसेसे पुरस्कार
भारतीय वन सेवा के अधिकारी संजीव चतुर्वेदी और गूंज एनजीओ संस्था के संस्थापक अंशु गुप्ता को 2015 का रमन मैगसेसे पुरस्कार दिया गया है। चतुर्वेदी भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ते रहे हैं तो गुप्ता गरीबों को पुराने कपड़े पहुंचाते हैं।
2002 बैच के आईएफएस अधिकारी संजीव चतुर्वेदी शुरू से ही भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ते आ रहे हैं। पिछले पांच साल में उनके 12 तबादले हो चुके हैं और यही नहीं उनके खिलाफ अपराधिक प्रकरण भी पंजीबद्ध कराए गए हैं। हुड्डा सरकार के खिलाफ भ्रष्टाचार की लड़ाई लड़ने वाले चतुर्वेदी ने एम्स में भ्रष्टाचार का मामला खोला था जिसके बाद उन्हें एम्स से हटा दिया गया। अभी वे एम्स के डिप्टी सेक्रेटरी हैं।
वहीं मेग्सेसे पुरस्कार से नवाजे दूसरे व्यक्ति अंशु गुप्ता की संस्था गूंज ने गरीबों को उनका तन ढंकने के लिए सैकड़ों टन कपड़े उपलब्ध कराए हैं। कपड़े देने की शुरूआत 67 कपड़ों से 1998 में हुई थी जिसके लिए आज 21 राज्यों में गूंज के कलेक्शन सेंटर हैं।
भारत के किन्हें अब तक मिले मेग्सेसे
मदर टेरेसा (1962), जयप्रकाश नारायण (1965), सत्यजीत रे (1967), किरण बेदी (1994), महाश्वेता देवी (1997, जेम्स माइकल लिंगदोह (2003), वी शांता (2005), अरविंद केजरीवाल (2006) और पी साईंनाथ (2007) के नाम हैं।




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