श्रम सुधारों के खिलाफ श्रमिक संगठनों का विरोध

भाजपा सरकार के श्रम सुधारों की घोषणाओ के खिलाफ मध्यप्रदेश में सभी केन्द्रीय श्रमिक संगठनों का विरोध किया। संगठनों ने जगह जगह प्रदर्शन किया। आज सुबह 10 बजे से 11 बजे के बीच पूरे प्रदेश में श्रमिकों व कर्मचारियों के विरोध कार्रवाई की श्रृंखला के जरिये
विरोध का एक नए स्वरूप दिखा। जो भी श्रमिक कर्मचारी जहां भी था, चाहे अपने उद्योग में, कार्यालय में, कार्यस्थल पर या घर पर, हाथों में तख्तियाँ लेकर, शारीरिक दूरी के मानकों का पूरी तरह पालन करते हुए उन्होने म प्र सरकार के मालिकपरस्त श्रम सुधारों के खिलाफ अपना विरोध व्यक्त किया। सुबह से ही सोशल मीडिया पर इन विरोध की तसवीरों का तांता लगा रहा।

श्रम सुधारों के नाम पर कारखानों में 12 घंटे की पाली, श्रम कानूनों के परिपालन के लिये निरीक्षण पर रोक, ठेका श्रमिकों के लिये ठेकेदारों की मनमर्जी, दुकानों एवं संस्थानों में 18 घंटे का काम की व्यवस्था कायम करने की शिवराज सरकार की घोषणा के खिलाफ केन्द्रीय श्रमिक संगठनों, कर्मचारी महासंघों के आह्वान पर आज प्रदेश में यह विरोध कार्रवाई हुई। ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मोर्चे के नेताओं- इंटक प्रदेश अध्यक्ष आर.डी. त्रिपाठी, सीटू प्रदेश महासचिव प्रमोद प्रधान, एटक
प्रदेश महासचिव अजीत कुमार जैन, एचएमएस प्रदेश अध्यक्ष हरिओम सूर्यवंशी, एआईयूटीयूसी अध्यक्ष जे.सी. बरई, बैंक
कर्मचारियों के महासचिव वी.के शर्मा, केन्द्रीय कर्मचारियों के महासचिव यशवंत पुरोहित, बीमा कर्मचारियों के सहसचिव पूषण
भट्टाचार्य, बीएसएनएल कर्मचारियों के प्रांतीय सचिव प्रकाश शर्मा ने एक संयुक्त विज्ञप्ति जारी कर यह जानकारी देते हुए प्रदेश के श्रमिकों और कर्मचारियों को इस त्वरित विरोध पर बधाई दी। पूरे प्रदेश से आ रही सूचना के अनुसार प्रदेश के कोयला के तीनों क्षेत्र एनसीएल-डब्ल्यूसीएल-एसईसीएल, एनटीपीसी, भेल, नैशनल फर्टिलाईजर गुना, ग्रेसीम नागदा, रेमण्ड्स छिंदवाड़ा के अलावा सीमेंट, अल्यूमिनियम, मैंगनीज खदान जैसे उद्योगों, आंगनवाड़ी, आशा-उषा कर्मी, बीड़ी मजदूर, निर्माण श्रमिकों, हम्माल-पल्लेदार, दवा प्रतिनिधि, बीमा कर्मचारी, बैंक कर्मचारी, केंद्रीय कर्मचारी, बीएसएनएल कर्मचारियों ने कार्रवाई में हिस्सा लिया। राजधानी भोपाल के अलावा औद्योगिक क्षेत्र मंडीदीप, पीलूखेड़ी, मालनपुर, पीथमपुर आदि में भी प्रदर्शन हुआ। अब तक प्राप्त जानकारी अनुसार छिंदवाड़ा, बालाघाट, बैतूल, सीहोर, रायसेन, राजगढ़, उज्जैन रतलाम, नीमच, मंदसौर, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, गुना, अशोकनागर, मुरैना, भिंड, सिंगरौली,सीधी, रीवा, सतना, कटनी, जबलपुर, डिंदौरी, मंडला, सागर, छतरपुर, पन्ना, टीकमगढ़ आदि जिलों में यह कार्रवाई हुई।

इस अवसर पर संयुक्त मोर्चे के नेताओ ने कहा है कि राज्य सरकार का यह निर्णय अन्यायकारी, एकतरफा, भेदभावपूर्ण व कारपोरेटपरस्त है। नेताओं ने कहा कि लॉक डाउन में नियोजकों, कारपोरेट घरानों, ठेकेदारों, बिल्डर्स, की मुनाफे की हवस और गैर जिम्मेदाराना व्यवहार के चलते जब आज लाखों मजदूर सड़कों पर बेबसी और भुखमरी के शिकार हो रहे है तब इन पर अंकुश लगाने के बजाय मजदूरों पर गुलामी थोपना कितना जायज है? मोर्चे के नेताओं ने कहा कि प्रदेश में दलबदल कर बनायी गयी सरकार ने वैधानिक व जनतांत्रिक प्रक्रियाओं को धता-बताकर इन केन्द्रीय कानूनों में बदलाव कर दिखाया है कि उस के लिये कारपोरेट्स का हित सर्वोपरि है। प्रदेश के श्रमायुक्त द्वारा जारी पत्र क जरिये लॉक डाऊन के दौरान ड्यूटी पर न आने वाले श्रमिकों का वेतन काटने की मालिकों को दी गयी खुली छूट की भी नेताओं ने तीखी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि आज जब श्रमिक रेड जोन और कंटनमेंट के चलते प्रशासनिक पाबंदियों में फंसा हुआ है, तब उनकी
अनुपस्थिति पर वेतन कटौती की इजाजत देना अन्यायपूर्ण है। उन्होने कहा कि यदि सरकार मजदूर विरोधी निर्णय को वापस नही लेगी को आंदोलनात्मक कार्यवाही पूरे देश भर में किया जाने का निर्णय लिया जाएगा।

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