शाह की शह पर अहमद की आह लगी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के गृह प्रदेश गुजरात में शाह की राजनीतिक चपलता मंगलवार की रात चल नहीं सकी। उन्हें कांग्रेस के चाणक्य माने जाने वाले अहमद पटेल की कुटिल नीति से मात मिल गई। शाह ने कांग्रेस के जिन दो विधायकों के सहारे पटेल को शह दी थी, वहीं उन्हें उलटी पड़ गई क्योंकि अहमद की आह ऐसी लगी कि जिन दो बैसाखियों के सहारे उन्हें शह मिली थी, वे ही चुनाव आयोग ने तोड़ दीं। रात पौने दो बजे कांग्रेस के वजीर ने बीजेपी के राजा को धराशायी कर दिया।
कांग्रेस और बीजेपी के बीच शह पर शह की बाजी 2013 से चली आ रही है जिसमें 2014 से लेकर बिहार में नीतिश सरकार को गिराने और फिर अपने समर्थन से सरकार बनाने तक जारी है। मगर बात गुजरात की आई तो अमित शाह व नरेंद्र मोदी को एक और मौका मिल गया। इस बार लगा कि घर के घर में कोई मात देने की हिम्मत नहीं करेगा। कांग्रेस के चाणक्य अहमद पटेल सामने थे तो बात उन्हें अपने लिए मिले तमगे को साबित करने की थी।
कांग्रेस ने बीजेपी की ताकत का अंदाज लगाते हुए इस शह-मात के खेल में सबसे बड़ा खेल खेला, अपने विधायकों को बीजेपी से दूर रखने का। कुछ विधायकों को तोड़ने में कामयाब रहने के बाद बीजेपी से दूर बंगलुरू में 44 विधायकों को ले जाया गया। अब क्या था बीजेपी भी अपनी ताकत का इस्तेमाल करने से कहां चूकने वाली थी तो उसने आईटी का इस्तेमाल किया। वहां उस होटल में छापे मारे जिसमें विधायकों को ठहराया गया था लेकिन बात नहीं बनी और चुनाव के कुछ दिन पहले ये सभी गुजरात में सुरक्षा प्रबंधों के बीच पहुंच गए। बीजेपी ने इन क्षणों को भी केश करने में कोई देरी नहीं की और दो विधायकों भोला भाई गोहिल व राघवजी भाई पटेल को अपने शिकंजे में ले लिया। मगर लगता है कि बीजेपी का यह भ्रम था क्योंकि अहमद पटेल की चाल का शायद यह एक हिस्सा रहा। उन्होंने अपने विधायकों को बीजेपी के संपर्क में रहकर अंतिम समय में वोट को अवैध करने की रणनीति बना रखी थी।
मंगलवार को जब वोटिंग हुई तो अमित शाह को लगा कि भोला भाई और राघवजी ने उन्हें वोट दिखाकर यह साबित कर दिया कि अहमद पटेल को उन्होंने बाजी में मार गिराया है। हालांकि वोट दिखाए जाने को लेकर कांग्रेस के पोलिंग एजेंट ने तुरंत विरोध भी दर्ज कराया था जिसे रिटर्निंग ऑफीसर ने हल्के ढंग से लेकर मतदान जारी रखा। शाम को मतदान समाप्त होते ही अहमद पटेल ने अपना गेम प्लान ओपन किया। चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज करा दी कि कांग्रेस के दो विधायकों ने बीजेपी के नेताओं को अपना वोट दिखाया है तो उनके मतों को निरस्त किया जाए। हरियाणा और राजस्थान में इसी तरह के प्रकरणों का हवाला देकर दोनों वोटों को निरस्त कराने के लिए तीन बार कांग्रेस दिग्गजों को चुनाव आयोग में भेजा तो बीजेपी अध्यक्ष ने भी छह केंद्रीय मंत्रियों को आयोग पर दबाव बनानेके लिए भेजा। मगर रात 11 बजे आयोग ने दोनों मतों को निरस्त कर मतगणना शुरू करने का आर्डर पारित कर दिया। इसके बाद भी स्थानीय स्तर पर बीजेपी ने करीब एक बजे तक मतगणना शुरू नहीं होने दी तो चुनाव आयोग के हस्तक्षेप पर काउंटिंग शुरू हुई और फिर शह और मात का खेल अहमद पटेल की जीत के साथ समाप्त हुआ। अमित शाह राज्यसभा की अपनी सीट जीतने के बाद भी अपने घर में एक तरह हारे हुए दिखाई दिए।

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