शबरी प्रसंग, बालि वध और लंका दहन प्रसंगों का मंचन

एकाग्र ‘गमक’ श्रृंखला अंतर्गत  पाँच दिवसीय रामलीला के चौथे दिन 23 अक्टूबर को शबरी प्रसंग, बालि वध और लंका दहन प्रसंगों का मंचन किया गया। लीला मंचन में आज श्रीराम, माता सीता की खोज करते-करते शबरी के आश्रम पहुँचते हैं, जहाँ शबरी वर्षों से उनकी प्रतीक्षा कर रही होती है, रोज अपनी कुटिया सजाती है, राह में फूल बिछाती है और वन से मीठे-मीठे बेर लाती है|

जैसे ही शबरी को पता चला की श्रीराम आयें हैं वह भाव विभोर हो जाती है और अपनी सुध-बुध भूल जाती है, भक्ति-भाव से अपने अश्रुओं से श्रीराम के चरण धोती है, उन्हें चख-चख कर अपने जूठे बेर खिलाती हैं और भगवान भक्तिवश उनका भोग करते हैं| शबरी श्रीराम को सुग्रीव का पता बताती हैं|श्री राम माता शबरी को भक्ति, समपर्ण और विश्वास का आधार बताते हैं | इस तरह मातंगी ऋषि का आशीर्वाद फलित होता है और शबरी को मोक्ष प्राप्त होता है|  

श्रीराम, की सुग्रीव से भेंट होती है, वह भाई बालि के अत्याचारों के बारे में बताते हैं और उसके भय से मुक्ति की विनती करते हैं| श्रीराम के कहने पर सुग्रीव बालि को युद्ध के लिए ललकारता है| श्रीराम पेड़ की ओट से बाण चलाकर बालि का वध कर देते हैं| पश्चात् हनुमान लंका जाकर माता सीता को भगवान श्रीराम की मुद्रिका देकर उनके साहस को संबल प्रदान करते हैं तथा माता सीता की शंका का समाधान करने के लिए हनुमान अशोक वाटिका को उजाड़ते हैं, रावण के पुत्र अक्षय कुमार का वध करते हैं, लेकिन मेघनाथ की ब्रह्मफांस में बंधकर रावण के दरबार में जाते हैं और रावण से श्रीराम की शक्ति का वर्णन करते हैं । क्रोधित होकर रावण अपने सलाहकारों के कहने पर हनुमानजी की पूंछ में आग लगा देते हैं, इससे हनुमानजी पूरी लंका ही जला देते हैं| 

          मध्यप्रदेश की इस पारंपरिक लीला मण्डली के साथ समकालीन नाट्य प्रयोगों को जोड़ते हुए संवाद, अभिनय, वेशभूषा, रंगभूषा, प्रकाश, मंचीय सज्जा आदि का कार्य परिष्कार की दृष्टि से किया जा रहा है| ख्यात रंगकर्मी, निर्देशक श्री जयंत देशमुख, मुंबई इन कलाकारों के साथ कथा मंचन के पूर्व अभ्यास और संवाद के माध्यम से परिष्कार का कार्य कर रहे हैं |   

          जनजातीय संग्रहालय के मुक्ताकाश मंच पर नवाचार और नयनाभिराम दृष्य बिम्बों में प्रस्तुत हो रही इस रामलीला को दर्शकों द्वारा काफी सराहा जा रहा है| दर्शकों ने करतल ध्वनि से कई बार कलाकारों का उत्साह वर्धन किया|  

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