वैशाली गुप्ता के निर्देशन में ‘रंग संगीत’ की प्रस्तुति

एकाग्र ‘गमक:रंग मध्यप्रदेश’ श्रृंखला अंतर्गत उर्दू अकादमी द्वारा आज सुश्री वैशाली गुप्ता, भोपाल के निर्देशन में  ‘रंग संगीत’ की प्रस्तुति हुई | प्रस्तुति की शुरुआत- महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की ‘वर दे वीणावादिनी’ से हुई.

उसके बाद ‘जबसे एफ.ए. फ़ैल हुआ हमारे कालेज का बचुआ’, ‘घुमड़-घुमड़ घन साबन आये’, ‘मैं अकेला देखता हूँ’, डॉ. देवेन्द्र दीपक की कोलाज कविता, मास्टर धरमदास के अंश, मैथिलीशरण गुप्त की बाल कविता ‘सर्कस’, निराला की ‘जागो फिर एक बार’, माखनलाल चतुर्वेदी की बहुचर्चित चर्चा ‘पुष्प की अभिलाषा’, गुरुदेव रविन्द्रनाथ ठाकुर की ‘हे गुणी तू कैसे गाता हूँ’, सुभद्रा कुमारी चौहान की लोकप्रिय कविता ‘सिंहासन होल उठे, राजवंशों ने भृकुटी तानी थी’, जयशंकर प्रसाद की रचना ‘हिमाद्री तुंग श्रृंग से’, रामधारी सिंह दिनकर की ‘कृष्ण की चेतावनी’, स्वामी विवेकानंद की ‘सूर्य भी नहीं है’ और रमेश पोखरियाल निशंक की रचना ‘कह रही है जिन्दगी’ आदि कविता और गीतों को कहानी के माध्यम से प्रस्तुत किया गया |    

सुश्री गुप्ता द्वारा विभिन्न साहित्यकारों, कवियों की कविताओं एवं गीतों को एक सूत्र में प्रस्तुत कर एक नवीन प्रयोग करने का प्रयास किया गया है, जिससे गीतों का पक्ष सामान्य जन के मनोभावों तक पहुँच सके और कहानी की लयात्मकता होने से युवा वर्ग भी आकर्षित हो सके|  

मंच पर- श्री अंकित तिवारी, शुभराज सक्सेना, हर्ष राव, पराग नागोरे, प्रथम भार्गव, यश चौरे, युवराज सक्सेना, सौरभ, कृष्णा बिन्धानी लोहार, नव्यसागर, बनमाली बिन्धानी, सुश्रृत गुप्ता, हनी भार्गव, अमृत कौर, सुभद्रा बिन्धानी, पूर्णिमा शर्मा, माया, शालिनी मैना, रत्नेश भार्गव और निहारिका श्रीवास्तव ने प्रस्तुति दी|   

मंच परे- संगीत परिकल्पना एवं आलेख: सुश्रुत गुप्ता, कविता चयन एवं निर्देशन- सुश्री वैशाली गुप्ता| पश्चिम बंगाल के शिवपुर में जन्मी सुश्री गुप्ता ने स्नातक उपाधि के पश्चात् रवींद्र भारती विश्वविद्यालय, कोलकाता से कथकली, भरतनाट्यम एवं मणिपुरी नृत्यों की शिक्षा प्राप्त की| आप पिछले पैंतालिस वर्षों से अभिनय, निर्देशन एवं कोरियोग्राफी के क्षेत्र में सक्रिय हैं| आपने देश के कई वरिष्ठ रंग निर्देशकों में अभिनय किया है| स्कूल, निशक्तजन, किशोर बालक-बालिका गृह और ग्रामीण बच्चों में रंग-संस्कार की पहल, देश की कई प्रतिष्ठित मंचों पर अभिनय, निर्देशन एवं कोरियोग्राफी कर चुकी हैं| मध्यप्रदेश के शासकीय विद्यालयों के पैंतालीस जोलों में बैले नाट्य कार्याशाला का संचालन| आपने कई देशों में अपनी सांस्कृतिक यात्राएँ की है| संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार द्वारा फैलोशिप प्राप्त एवं अनेक सम्मान प्राप्त हैं|    

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