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विहान संस्था की महिला गायिकाओं द्वारा ‘चारबैत’ की प्रस्तुति
एकाग्र ‘गमक:रंग मध्यप्रदेश’ श्रृंखला अंतर्गत उर्दू अकादमी द्वारा आज 04 नवम्बर, 2020 को विहान संस्था की महिला गायिकाओं द्वारा ‘चारबैत’ की प्रस्तुति हुई | प्रस्तुति की शुरुआत- मुस्कुरा के किसने देखा मुझको .. चिलमन के करीब, यही दिन हैं मेंहदी लगाने के काबिल, ये ना थी हमारी किस्मत के विसाले यार होता, हमे तो शाम ए ग़म में काटनी है जिंदगी, आलम .. में तो हर सिम्त बाहर आई हुई है और न आते हमें इसमे तकरार क्या थी आदि चारबैत प्रस्तुत किये |
चारबैत शायरी की एक ऐसी शैली हैं जिसमें इश्क-मोहब्बत के साथ शौर्य का बखान करने का अवसर होता है | चारबैत के अखाड़े या पार्टियाँ मैदान में मंच बनाकर बीस-पच्चीस फिट की दुरी पर लकड़ी का तखत पर आमने-सामने बैठकर एक दुसरे पर शायरी के माध्यम से विजय प्राप्त करने की कोशिश करती हैं| चारबैत गायन में सवाल-जवाब होते हैं तथा यह कार्यक्रम रात में आयोजित किये जाते हैं|
इस समूह को चारबैत का प्रशिक्षण मध्यप्रदेश उर्दू अकादमी ने एक कार्यशाला में दिया उसके बाद इस ग्रुप ने देश कई हिस्सों में इसकी प्रस्तुति दी| मंच पर-श्वेता केतकर, तेजस्विता अनंत, निवेदिता सोनी, सृष्टि भागवत, व्याख्या चौहान एवं ईशा गोस्वामी ने प्रस्तुति दी|




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