विश्व रंग 2020: बाल साहित्य, कला, संगीत महोत्सव का आगाज आज से

देश के प्रसिद्ध पेरेंटिंग यू—ट्यूब चैनल गेट—सेट—पेरेंट विद पल्लवी द्वारा विश्व रंग
2020 के अंतर्गत पहला बाल साहित्य, कला और संगीत महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। इसका आयोजन 22 से 29 नवंबर 2020 के मध्य होने जा रहा है। यह टैगोर अंतरराष्ट्रीय साहित्य, कला और संगीत महोत्सव का द्वितीय संस्करण है जिसमें अंग्रेजी के अलावा हिन्दी और क्षेत्रीय भाषाओं का भी समन्वय किया गया है।

कोविड—19 महामारी के कारण यह आयोजन गेट—सेट—पेरेंट विद पल्लवी यू—ट्यूब चैनल पर प्रतिदिन 2 घंटे आनलाइन आयोजित किया जाएगा। इस बाल महोत्सव के अंतर्गत स्कूल के बच्चों को भागीदारी करने का मौका दिया गया है। यह पूरी तरह से नि:शुल्क आयोजन है। साप्ताहिक बाल महोत्सव का आरंभ बाल लेखकों के संवाद कार्यक्रम से होगा जिसके अंतर्गत प्रथम सत्र में देश के प्रसिद्ध बाल लेखक रस्किन बांड संवाद सत्र में भागीदारी करेंगे। साथ ही प्रसिद्ध बाल लेखक रोहिणी नीलकेणी भी एक सत्र में शामिल होंगी। इस आयोजन के अंतिम दिन के सत्र में प्रसिद्ध मायथोलॉजिकल फिक्शन लेखक आनंद नीलकंठन सभी दर्शकों से रूबरू होंगे।

इस महोत्सव के बारे में डॉ. पल्लवी राव चतुर्वेदी (संस्थापक— गेट—सेट—पेरेंट विद पल्लवी तथा विश्व रंग 2020 के अंतर्गत बाल साहित्य, कला व संगीत महोत्सव की निदेशक का कहना है कि ‘कोरोना महामारी की वजह से पूरी दुनिया के लोग पिछले 8 माह से घरों में कैद होकर रह गये हैं। लॉकडाउन का समय सभी के लिये, विशेषकर बच्चों के लिये चुनौती भरा रहा है। क्योंकि बच्चे स्वभाव से बहुत ही चंचल होते हैं और हमेशा कुछ न कुछ नया सीखने
का प्रयास करते रहते हैं। उनकी इसी नया जानने की अभिलाषा को हम साप्ताहिक बाल महोत्सव के द्वारा एक मंच प्रदान करने तथा सक्रियता से ऑनलाइन प्रतियोगिताओं में भाग लेने का अवसर प्रदान करने का कार्य करने जा रहे हैं। इस महोत्सव के द्वारा बच्चे सुरक्षित तरीके से घर बैठे—बैठे कई प्रतियोगिताओं में भागीदारी करने के साथ ही देश के प्रसिद्ध बाल लेखकों से भी संवाद स्थापित कर पायेंगे।’ बच्चे लिंक के माध्यम से प्रतियोगिता में भागीदारी भी कर सकते हैं। यह लिंक है — https://vishwarang.com/childrensLitfest

विश्वरंग के दूसरे दिन के मुख्य आकर्षण’टैगोर अंतर्राष्ट्रीय साहित्य एवं कला महोत्सव’ विश्वरंग का दूसरा दिन डॉ. बिंदू जुनेजा के ओड़िसी नृत्य के साथ शुरू हुआ। हिंदी और भारत की अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में रचित साहित्य और कला को नई पहचान दिलाने के लिए आयोजित किया जाने वाले इस महोत्सव में दूसरे दिन प्रारंभ मंगलाचरण कार्यक्रम में बिंदू जुनेजा ने शानदार ओड़िसी नृत्य की प्रस्तुति दी। दिन के पहले सत्र का संचालन विनय उपाध्याय ने किया। नर्मदा परिक्रमा नाम के इस कार्यक्रम में मध्यप्रदेश की जीवनदायिनी नदी मां नर्मदा की अराधना हुई। मां नर्मदा की महिमा का बखान करने वाले श्री नर्मदाष्टकम नृत्य की शानदार प्रस्तुति देकर बिंदू जुनेजा ने सभी को मनमोहित कर लिया।
कोविड के बाद की दुनिया कार्यक्रम का संचालन विश्वरंग के सहनिदेशक श्री सिद्धार्थ चतुर्वेदी ने किया। एस.एस. मंथा (पूर्व अध्यक्ष ए.आई.सी.टी.ई.) नवीन मित्तल (कमिश्नर कॉलेज एवं तकनीकि शिक्षा, तेलंगाना) अंतरप्रीत सिंह (डायरेक्टर, डिजिटल लर्निंग, आई.एस.बी.) इस चर्चा में शामिल हुए। शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्यमिता, कला और संस्कृति पर कोरोना का क्या प्रभाव रहा है और इससे हम कैसे बच सकते हैं। इन विषयों पर कार्यक्रम में चर्चा हुई। शिक्षा
पर कोरोना का सबसे ज्यादा प्रभाव रहा है। इस पर बात करते हुए डॉ. एस.एस. मंथा ने बताया कि क्लासरूम स्टडी बंद होने के बाद ऑनलाइन एजुकेशन का महत्व बढ़ा है, पर शिक्षकों को ऑनलाइन एजुकेशन की ट्रेनिंग ना होने के कारण लगातार परेशानी हो रही है और हमें इस विषय पर सबसे ज्यादा काम करने की जरूरत हैं।
प्रसिद्ध चित्रकार अशोक भौमिक ने मानवतावादी चित्रकला और टैगोर पर अपने विचार रखे। इस सत्र का संचालन जैनेन्द्र सिंह ने किया। विश्व कविता सत्र में कई जाने-माने साहित्यकारों ने रविन्द्रनाथ टैगोर और अन्य प्रसिद्ध कवियों की कविताओं के अनुवाद का पाठ किया। सत्र की अध्यक्षता रघुवीर चौधरी और संचालन प्रांजल धर ने किया। सबसे पहले कुमार मुकुल जी ने टैगोर की अनुवादित कविता का पाठ किया। पहली कविता मेरे प्यार की खुशबू ने सभी श्रोताओं का दिल जीत लिया। लेखक से मिलिए कार्यक्रम में ममता कालिया और गीतांजलि श्री से रेखा कस्तवार ने साहित्य से जुड़े विविध विषयों पर बात की। इसी कार्यक्रम में आगे डॉ. अनामिका और डॉ. रेखा सेठी के बीच संवाद हुआ और अनुज लगुन से महादेव टोप्पो ने चर्चा की। धनंजय सिंह ने अपने व्याख्यान में देश में थर्ड जेंडर की हालत समझाने की कोशिश की, जबकि उनके शास्त्रीय नृत्य ने सभी का मन मोह लिया। विश्वरंग यू.एस.ए. फिल्म में एक बार फिर अमेरिका में भारतीय संस्कृति की गहरी छाप देखने को मिली। इसके उपरांत हेक्टर ग्रासिया, फ्रांसेस मिरालेस और डॉ. पल्लवी चतुर्वेदी ने इकियागे पर बातचीत की। विदेश में प्रकाशित हो रही हिंदी पत्रिकाओं पर भी इस कार्यक्रम में प्रकाश डाला गया। इस दौरान जवाहर कर्णावत की फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया।

विश्वरंग सिंगापुर फिल्म के बाद कविता की शाम कार्यक्रम का आयोजन हुआ। इस सत्र में अनुपमा सिंह ने प्रसिद्ध गीतकार मनोज मुंतशिर से बात की। “तारीफों के लायक ना शोहरत का हकदार हूं सारी बिजली तो उसकी है मैं तो बस तार हूं।” इन पंक्तियों के साथ उन्होंने बात शुरू की। उन्होंने कहा कि हमारे लिए अपनी तरफ पलटकर देखने का यह सही समय है। हमने बाहर की तरफ बहुत देख लिया है अब हमें खुद की तरफ देखने की जरूरत है। रोम के एक भिखारी की कहानी के जरिए उन्होंने बताया कि भारत में कितना खजाना छिपा पड़ा है और हम बाहर की तरफ देख रहे हैं। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने अपने सबसे सफल गाने ‘तेरी मिट्टी’ पर भी बात की। अमीर खुसरो की यात्रा दास्तान गोई पर दिल्ली घराना की शानदार नाट्य प्रस्तुति के साथ विश्वरंग 2020 का दूसरा दिन समाप्त हुआ।

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