विवेचना के साथ राहत प्रकरणों का भी यथोचित निराकरण करें- डीजीपी

पुलिस महानिदेशक विवेक जौहरी ने आज अजाक शाखा पुलिस मुख्‍यालय में दो दिवसीय ”अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्गों के प्रति संवेदनशीलता” विषय पर आयोजित वेबिनार का समापन किया। उन्‍होंने इस तरह के प्रशिक्षण को आवश्‍यक बताते हुए कहा कि कानूनी संशोधन को समझाने और पुलिस अधिकारियों के सामने आई नई कठिनाईयों को सुलझाने के लिए समय-समय पर ऐसे सेमीनार का आयोजन किया जाना चाहिए।

पुलिस महानिदेशक विवेक जौहरी ने कहा कि अजाक शाखा की कार्यशैली से पुलिस और शासन की छवि बनती है। इसलिए हमें ऐसा कार्य करना चाहिए कि शासन गर्व करे। उन्होंने आने वाले समय में समय निकालकर स्वयं सेमीनार में सम्मिलित होकर परिचर्चा में भाग लेने की इच्छा भी जताई। उन्होंने कहा कि पुलिस का काम के‍वल इन प्रकरणों की विवेचना करना ही नहीं है बल्कि राहत प्रकरणों का यथाशीध्र-यथोचित निराकरण कराकर पीडि़त पक्ष को शासन की योजनाओं का लाभ दिलाना भी है। एससी/एसटी वर्ग के लोगों को शासन की योजनाओं की जानकारी ही नहीं होती है, इसलिए उनके हितों के संरक्षण और प्रोत्साहन के लिए बनाई गई स्कीमों तक उनकी पहुंच सुलभ बनाने के लिए हमें सहयोग करना चाहिए।

समापन अवसर पर अतिरिक्‍त पुलिस महानिदेशक अजाक श्रीमती प्रज्ञा ऋचा श्रीवास्‍तव ने दो दिवस में हुई गतिविधियों के बारे में विस्‍तार से बताया। उन्‍होंने बताया कि इस बार  नवाचार करते हुए सिस्को वेबेक्स का इस्तेमाल से गुणवत्ता में करते हुए पहले से अधिक प्रशिक्षणार्थियों को शामिल करने का प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि जब पुलिस अधिकारी संवेदनशील बनेंगे, तभी ऐसे सेमीनार के आयोजन का उद्देश्य सार्थक होगा और किसी भी सेमीनार की सार्थकता या उपयोगिता को साबित करने का मापदंड यही है कि हम ज्यादा संवेदनशील हों, हम फरियाद सही तरीके से लिखें, अनुसंधान अच्छे से करें और सजायाबी की दर में सुधार देखने को मिले।

      वेबिनार में आज पुलिस अधीक्षक इओडब्ल्यू श्री धनंजय शाह ने एससी/एसटी एक्ट के पीड़ितों को राहत प्रकरण, पीड़ित प्रतिकर, गवाही भत्ता एवं अन्य शासकीय योजनाओं पर प्रकाश डाला। इसके बाद अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक भोपाल श्री राजेश सिंह भदौरिया ने एफआईआर लिखने से लेकर चालान पेश होने तक वे कौनसी चूकें होती हैं, जिनका लाभ अपराधी को मिलता है, के बारे में विस्‍तार से बताया। उन्होंने स्वतंत्र साक्ष्य संकलन की आवश्यकता और उसके वैधानिक महत्व पर प्रकाश डाला। जप्ती, मेमोरेंडम, पूछताछ एवं भौतिक साक्ष्य संकलन के संबंध में सीआरपीसी में विहित प्रक्रिया और सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिये गये दिशा निर्देशों के साथ ही विभागीय निर्देशों के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि नियम-निर्देशों का पालन करके ही निष्पक्ष और प्रभावी अनुसंधान किया जा सकता है। उन्होंने एफआईआर लिखने का तरीका भी बताया और कहा कि एफआईआर के मजमून में जहाँ घटना से संबंधित अधिक से अधिक तथ्य आ जाना चाहिए, वहीं इसमें अनावश्यक तथ्यों का समावेश नहीं करना चाहिए। प्रथम सूचना संक्षिप्त हो सकती है, किन्तु वह स्पष्ट और सारगर्भित होना चाहिए। यह अपराधियों को दंडित करने का आधार बनता है।

समापन समारोह में पुलिस अधीक्षक अजाक उज्जैन श्री प्रमोद सिन्हा ने दो दिवसीय वेबिनार के सभी सेशन में अजाक शाखा एवं एससी/एसटी एक्ट के विशेषज्ञों द्वारा दिये गये व्याख्यानों में समाहित विषयों तथा बिन्दुओं के साथ ही प्रशिक्षणार्थियों की जिज्ञासाओं तथा उनके समाधान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह सेमीनार हमें कानूनी रूप से अधिक सक्षम बनाता है, क्योंकि इसमें पूर्व से मौजूद कानूनी प्रावधानों के साथ-साथ नये संशोधनों में चर्चा के माध्यम से सीखने को मिला। इस सेमीनार में व्यावहारिक पहलुओं को भी शामिल किया गया है जो हमारी रोजमर्रा की कार्यवाही में अत्यंत उपयोगी साबित होंगे और इससे निश्चित तौर पर हमारी कार्यकुशलता में ईजाफा होगा। पुलिस अधीक्षक ग्वालियर/चंबल डॉ. रायसिंह नरवरिया ने प्रतिभागियों की ओर से फीडबैक देते हुए कहा कि सभी प्रतिभागियों ने विषय विशेषज्ञों से परस्‍पर संवाद कर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान किया।

सेमीनार का संचालन श्री डी.आर. तेनीवार ने किया। कार्यक्रम के संचालन में श्री एच.एल. शर्मा ने भी  सहयोग प्रदान किया। विधि अधिकारी श्री विजय बंसल ने आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर वरिष्‍ठ अधिकारी तथा अजाक शाखा के समस्त अधिकारी/कर्मचारियों मौजूद थे।

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