-
दुनिया
-
फिर Political माहौल की गर्मा गरमी के बीच बेतुका फैसला, MP कांग्रेस के प्रवक्ताओं की छुट्टी
-
आमिर, सलमान के प्लेन को उड़ाने वाली MP की पायलट संभवी पाठक महाराष्ट्र के Dy CM के साथ हादसे में मृत
-
MP नगरीय विकास विभाग दागदारः दूषित पानी से बदनाम हुआ स्वच्छ Indore तो Bhopal के स्लाटर हाउस में गौ हत्या
-
साँची बौद्ध भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय बौद्ध विद्वान का दौरा
-
प्रतिष्ठित VIT ग्रुप के सीहोर कॉलेज में कुप्रबंधन से नाराज छात्रों का हंगामा, गाड़ियां जलाईं, तोड़फोड़…जांच कमेटी बनी
-
विविध कलानुशासनों की गतिविधियों का ऑनलाइन प्रदर्शन
मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति विभाग की विभिन्न अकादमियों द्वारा कोविड-19 महामारी के दृष्टिगत बहुविध कलानुशासनों की गतिविधियों पर एकाग्र श्रृंखला ‘गमक’ का ऑनलाइन प्रसारण सोशल मीडिया प्लेटफोर्म पर किया जा रहा है| श्रृंखला अंतर्गत आज जनजातीय लोक कला एवं बोली विकास अकादमी द्वरा सुश्री कमला बाई भूरिया और साथी, देवास का ‘मालवी गायन’ एवं श्री विक्की बाघमारे और साथी, बैतूल द्वारा ‘गोंड जनजातीय’ नृत्य प्रस्तुति का प्रसारण विभाग के यूट्यूब चैनल- https://youtu.be/VpSsB57J1xM और फेसबुक पेज- https://www.facebook.com/events/532239364760619/?sfnsn=wiwspwa पर लाइव प्रसारित किया गया|
श्रृंखला अंतर्गत प्रथम प्रस्तुति सुश्री कमला बाई भूरिया और साथियों द्वारा ‘मालवी गायन’ की हुई| सुश्री कमला बाई ने गायन की शुरुआत गणेश वंदना- चालो हो गजानंद जोशी का चाला से की उसके बाद पारंपरिक मालवी लोकगीत- साहबा म्हारे लहदो करणफूल झुमका, मामेरा गीत- सांवरियो वीरो म्हारो मामेरो भर लाया रे, वर्षा गीत- अरर… सावण आयो रे एवं लोकगीत- सँवारा रे म्हारो जियो घबराय मालवी गीतों का गायन किया|
प्रस्तुति में सुश्री कमला बाई भूरिया के साथ सहगायन में श्रीमती द्रोपती देवी, श्रीमती मधु भाभर एवं श्रीमती सुनीता सेवदा ने और हारमोनियम पर- श्री अशोक कुमार, ढोलक पर- श्री शान्तीलाल राजोरिया ने संगत दी|
दूसरी प्रस्तुति श्री विक्की बाघमारे और साथियों द्वारा गोंड जनजातीय नृत्य ‘ठाट्या’ और ‘ढंढार’ की प्रस्तुति हुई| प्रस्तुति में श्री विक्की बाघमारे के साथ कोंगा युवने, दिलीप युवने, मिलाप युवने, गीताराम युवने, मन्सू युवने, सीडू युवने, गुड्डू युवने, राजू उइके, निर्मल इरपाचे, भगवत इरपाचे एवं दर्शन उईके ने नृत्य में सहभागिता निभाई|
गोंड मध्यप्रदेश के मंडला जिले के चाड़ा के जंगलों के आस-पास रह्नेवाली जनजाति है और इनके नृत्यों में जीवन और प्रकृति के सुन्दर आयाम देखने को मिलते हैं| इन नृत्यों को देखते हुए जहाँ एक ओर हमें उनकी पारम्परिक वेशभूषा, संगीत और नृत्य का कौशल देखने को मिलता है वहीं दूसरी ओर इन नृत्यों के माध्यम से गोण्ड आदिवासियों की आस्थाएं उनके कर्मकांड और स्मृतियों के साथ चली आ रही महान विरासत के दर्शन भी होते हैं|




Leave a Reply