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विविध कलानुशासनों की गतिविधियों का ऑनलाइन प्रदर्शन
मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति विभाग की विभिन्न अकादमियों द्वारा कोविड-19 महामारी के दृष्टिगत बहुविध कलानुशासनों की गतिविधियों पर एकाग्र श्रृंखला ‘गमक’ का ऑनलाइन प्रसारण सोशल मीडिया प्लेटफोर्म पर किया जा रहा है| श्रृंखला अंतर्गत आज जनजातीय लोक कला एवं बोली विकास अकादमी द्वारा श्री संतोष केवट और साथी, नरसिंहपुर का बुन्देली ‘भक्ति गायन’ एवं श्री कृष्णा मालीवाड़ और साथी, मांडू द्वारा ‘भगोरिया नृत्य’ की प्रस्तुति का प्रसारण विभाग के यूट्यूब चैनल- https://youtu.be/IqicOunaaqc और फेसबुक पेज- https://www.facebook.com/events/544424696734622/?sfnsn=wiwspwa पर लाइव प्रसारित किया गया|
एक घन्टे की इस प्रस्तुति की शुरुआत श्री संतोष केवट और साथियों ने बुन्देली ‘भक्ति गायन’ से की जिसमे सर्वप्रथम देवी गीत- कहाँ गई मोरी आदि भवानी से की उसके बाद गणेश वंदना- पहलऊँ तुम्हरो बुलउआ, अइयो गजानन आसन डार हैं, माँ नर्मदा गीत- चलो भैया चलियें मैया के द्वार, गारी गीत- कलयुग में पहिया नई-नई बनाई, मजा सुनवे में आई एवं कबीर पंथी लोकगीत- हमको जुगनिया बना गये, अपन जोगी हो गये राजा|
प्रस्तुति में हारमोनियम पर- स्वयं श्री संतोष केवट, ढोलक पर- श्री आकाश बन्सफार, ऑक्टोपैड पर- दीपक मेहरा, ऑर्गन पर- श्री ब्रजेश पटैल, बांसुरी पर- श्री बाबूलाल केवट एवं नगड़िया पर- श्री भोपत सिंह केवट ने संगत दी|
श्री संतोष केवट विगत ग्यारह वर्षों से लोक गायन करते आ रहे हैं, आपने गायन अपनी माता श्रीमती कली बाई एवं पिता श्री राधेश्याम केवट से सिखा| श्री केवट प्रदेश कई प्रतिष्ठित मंचों पर अपनी प्रस्तुति दे चुके हैं|
दूसरी प्रस्तुति श्री कृष्णा मालीवाड़ और साथियों द्वारा ‘भगोरिया नृत्य’ की हुई| भगोरिया, भील समुदाय का पारंपरिक जनजातीय नृत्य है| भील- मध्यप्रदेश की झाबुआ, अलीराजपुर, धार और बड़वानी क्षेत्र में निवास करने वाली प्रमुख जनजाति है। फागुन मास में होली के सात दिन पूर्व से आयोजित होने वाले हाटों में पूरे उत्साह और उमंग के साथ भील युवक एवं युवतियों द्वारा पारंपरिक रंग-बिरंगे वस्त्र, आभूषण के साथ नृत्य किया जाता है, जिसे भगोरिया नृत्य कहते हैं| फसल कटाई के पश्चात् वर्षभर के भरण-पोषण के लिए समुदाय इन हाटों में आता है| भगोरिया नृत्य में विविध पदचाप समूहन पाली, चक्रीपाली तथा पिरामिड नृत्य मुद्राएँ आकर्षण का केंद्र होती हैं| रंग-बिरंगी वेशभूषा में सजी-धजी युवतियों का श्रृंगार और हाथ में तीरकमान लेकर नाचना ठेठ पारंपरिक व अलौकिक संरचना है|
भगोरिया नृत्य प्रस्तुति में कृष्णा मालीवाड़ के साथ भारत कटारे, लक्ष्मण मालीवाड़, संजय फुलगर, जीवन गावर, मदन भाभर, सन्तोष सिंगारे, राहुल कटारे, राकेश गिरवाल, रितेश पारगी, प्रकाश वास्केल एवं उमराव वास्केल ने सहभागिता की|




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