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विविध कलानुशासनों की गतिविधियों का ऑनलाइन प्रदर्शन
मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति विभाग की विभिन्न अकादमियों द्वारा कोविड-19 महामारी के दृष्टिगत बहुविध कलानुशासनों की गतिविधियों पर एकाग्र श्रृंखला ‘गमक’ का ऑनलाइन प्रसारण सोशल मीडिया प्लेटफोर्म पर किया जा रहा है। शृंखला के अंतर्गत आज जनजातीय लोक कला एवं बोली विकास अकादमी की ओर से सागर के श्री प्रभू सिंह और साथियों द्वारा आल्हा गायन, डिण्डोरी के श्री दिलीप कुमार रठुरिया एवं साथियों द्वारा बैगा जनजातीय नृत्य की प्रस्तुति दी गई। कार्यक्रम का प्रसारण विभाग के यूट्यूब चैनल https://youtu.be/wBH8ysUNdmQ और फेसबुक पेज https://fb.me/e/126gljWXA पर लाइव प्रसारित किया गया।
प्रस्तुति की शुरूआत में प्रभू सिंह और साथियों द्वारा आल्हा गायिकी में माड़ो गढ़ की लड़ाई की प्रस्तुति दी गई। उन्होंने बताया कि इस लड़ाई में आल्हा और उदल ने अपने पिता की मृत्यु का बदला लिया था। जगनेर के राजा जगनिक ने आल्हा-खण्ड काव्य में इन वीरों की 52 लड़ाईयों की गाथा को दर्शाया है। इस प्रस्तुति में गायन में प्रभु सिंह, ढोलक पर मधु प्रजापति, सिंथेसाइजर पर गब्बर रजक, मंजीरे पर रामलाल पटेल, अमान सिंह, त्रिकोण पर जशपाल सिंह एवं झूला गायन में कृष्ण कुमार ने संगत की।
इसके बाद डिण्डोरी के दिलीप कुमार रठुरिया और साथियों द्वारा बैगा जनजातीय नृत्य में करमा और फाग नृत्य की प्रस्तुति दी गई। बैगा समुदाय में फसल देवताओं के आगमन का प्रतीक है और कर्म फल मिलने का उदाहरण भी। कर्म पूजा व नृत्य ही करमा नृत्य को पूर्ण करता हैं। यह नृत्य क्वार माह में किया जाता है। इस नृत्य में पुरूष खड़े होकर मांदर एवं महिलाएं गोल घेरा बनाकर घूम घूम कर गीत गाते हुए नृत्य करती हैं। अगली कड़ी में कलाकारों द्वारा होली के अवसर पर किये जाने वाले फाग नृत्य की प्रस्तुति दी गई। इस प्रस्तुति में कलाकार दिलीप कुमार रठुरिया के साथ करीब 12 कलाकारों ने नृत्य प्रस्तुति दी।




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