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‘गमक’ का ऑनलाइन प्रसारण सोशल मीडिया प्लेटफोर्म पर किया जा रहा है। श्रृंखला के अंतर्गत आज संस्कृति संचालनालय- भोपाल की ओर से सुश्री जिजीविशा श्रीवास्तव और साथी सिवनी ने देशभक्ति पर आधारित ‘सुगम संगीत’ एवं सुश्री मोहिका सक्सेना, भोपाल द्वारा ‘भरतनाट्यम’ नृत्य की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम का प्रसारण विभाग के यूट्यूब चैनल- https://youtu.be/zxBfwkr1-x4 और फेसबुक पेज https://www.facebook.com/events/1186286178464486/?sfnsn=wiwspwa पर लाइव प्रसारित किया गया।
प्रस्तुति की शुरूआत जिजीविशा श्रीवास्तव और साथी ने देशभक्ति ‘सुगम संगीत’ से की। इसमें कलाकारो ने ऐ मेरे वतन के लोगों…, गीत गाया। इसके बाद अगली कड़ी में आवाज़ देके मुझे तुम बुलाओ…, अजी रूठकर कहां जाइयेगा…, लग जा गले…, जैसे गीतों को पेश किया। वहीं प्रस्तुति का समापन पिया तोसे नैना लागे…, और ऐ मेरे प्यारे वतन…, गीतों से किया। इनके साथ तबले पर सागर श्रीवास्तव, कैसियो पर रोहित, ढोलक पर अरिन श्रीवास्तव, हारमोनियन पर शिवम ने संगत की। कार्यक्रम की अगली कड़ी में सुश्री मोहिका सक्सेना, भोपाल ने ‘भरतनाट्यम’ नृत्य प्रस्तुत किया। उन्होंने विद्या भरतनाट्यम के अंतर्गत सरस्वती वंदना से की। देवी की आराधना के बाद उन्होंने अगली प्रस्तुति श्रृंगार लहरी और सौन्दर्य लहरी की प्रस्तुति दी। सौंदर्य लहरी आदिशंकराचार्य द्वारा रचित है। इस रचना में 2 श्लोकों को प्रस्तुत किया गया। जिसके जरिए बताया कि सर्व शक्तिमान महादेव शिव भी शक्ति के बिना शव हैं। शिव और शक्ति ( पार्वती) के संयोजन से ही ब्रह्मांड का संतुलन बना हुआ है और महादेव की पद रज से ही पृथ्वी का सृजन हुआ है। इसी प्रकार श्रृंगार लहरी माता पार्वती की सुंदरता का बोध कराती है। यह प्रस्तुति आदि ताल और राग मालिका में निबद्घ रही। प्रस्तुति का समापन तिल्लाना से किया। यह भरतनाट्यम पद्धति का अंतिम अंग है । इसकी तीव्र गति रोमांचित करने वाली होती है। तिल्लाना राग नट भैरवी और ताल आदि में निबद्ध रही।




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