मध्य प्रदेश में एक समय विंध्य में कांग्रेस के दो दिग्गजों अर्जुनसिंह और श्रीनिवास तिवारी के कारण पार्टी का वर्चस्व था लेकिन करीब दो दशक से यहां कांग्रेस के लिए सूखा जैसा है। इसकी वजह से दोनों दिग्गजों के निधन के बाद वहां अजय सिंह-कमलेश्वर पटेल दो नए ध्रुव बने जो विपरीत दिशाओं में चलते रहे जिसका खामियाजा कांग्रेस को चुनाव में भुगतना पड़ता रहा है। मगर आज विंध्य के इन दो विपरीत ध्रुवों के बीच जो व्यवहार क्षेत्रीय कार्यकर्ताओं ने देखा, उससे अब पार्टी के अच्छे परफार्मेंस की आस बांधी जा सकती है। पढ़िये क्या है इन नेताओं का बदला व्यवहार।
विंध्य में बीते दो दशक से कांग्रेस 31 सीटों में से अधिकतम 12 सीटों पर जीत दर्ज कर सकी है जिससे उसके हाथ से सत्ता की चाबी फिसलती रही है। इसकी मुख्य वजह विंध्य के नेताओं के बीच वर्चस्व का मामला दिखाई देता है। पूर्व मुख्यमंत्री, पूर्व केंद्रीय मंत्री व पंजाब के पूर्व राज्यपाल स्व. अर्जुन सिंह के पुत्र पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह और अर्जुन सिंह के निकट सहयोगी रहे स्व. इंद्रजीत पटेल के पुत्र कमलेश्वर पटेल इस समय कांग्रेस के विंध्य के प्रमुख नेताओं में शामिल हैं। अर्जुन सिंह और इंद्रजीत पटेल के निधन के बाद इन दोनों परिवारों के बीच ऐसा अबोलापन हुआ कि कांग्रेस को उससे कहीं न कहीं नुकसान हुआ। 2018 में कांग्रेस को यहां ऐसा झटका लगा कि केवल छह सीटें ही आईं और अजय सिंह भी चुनाव हार गए मगर कमलेश्वर पटेल चुनाव जीत गए तो कमलनाथ सरकार में विंध्य के प्रतिनिधित्व के रूप में उन्हें मंत्री बना दिया गया। इससे उनका कद बढ़ गया और इस पूरे कार्यकाल में पटेल को सरकार जाने के बाद संगठन में विशेष महत्व मिलता गया। मगर अजय सिंह हार के बाद पिछले चार साल से विंध्य क्षेत्र में सक्रिय रहे तो उन्हें तमाम कोशिशों के बाद भी वैसा नुकसान नहीं हुआ जो उनके विरोधियों द्वारा करने की कोशिश की गई। अजय-कमलेश्वर के रिश्तों में अब लचीलापन विधानसभा चुनाव 2023 के मद्देनजर संगठन की तरफ से पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को कमजोर प्रदर्शन वाली विधानसभा सीटों व इलाकों की जिम्मेदारी दिए जाने के बाद आज अजय सिंह व कमलेश्वर पटेल के रिश्तों को बदला-बदला देखा गया। दिग्विजय सिंह सीधी जिले के धौहनी विधानसभा क्षेत्र में कार्यक्रम में पहुंचे थे तो ये दोनों नेता भी वहां पहुंचे लेकिन एकदूसरे को कनखियों से देखने के बजाय ये एकदूसरे को मुस्कुराते नजर आए। बढ़ी बात तब हुई जब मंच पर इन दोनों विपरीत ध्रुवों को एकदूसरे के साथ गुपचुप बातचीत करते हुए देखा गया।
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