वरिष्ठ पंडवानी गायिका शांतिबाई चेलक द्वारा ‘गायन’ की प्रस्तुति

एकाग्र ‘गमक’ श्रृंखला अंतर्गत आज आदिवासी लोककला एवं बोली विकास अकादमी द्वारा वरिष्ठ पंडवानी गायिका सुश्री शांतिबाई चेलक, छत्तीसगढ़ द्वारा ‘गायन’ की प्रस्तुति हुई | 

          पंडवानी एक छत्तीसगढ़ी लोकगायन शैली है। जिसका अर्थ है पाण्डव वाणी अर्थात पाण्डव कथा है। इसमें महाकाव्य महाभारत के पाण्डवों की कथा सुनाई जाती है, जिसमें सभी मुख्य किरदारों के शौर्य, पराक्रम और अन्य कथानकों को विशिष्ठ गायन शैली में गाया जाता है । भावपूर्ण अभिनय और आंगिक चेष्टाओं से भरी इस गायन परम्परा ने अपनी पहचान बनाई है| ये कथाएं छत्तीसगढ़ की परधान तथा देवार जातियों की गायन परंपरा का मान है।  

          सुश्री चेलक ने गदापर्व की पंडवानी प्रस्तुत की, जिसमे महाकाव्य ‘महाभारत’ में भीम और दुरयोधन के बीच हुए गदा युद्ध के दृश्य को लोकगायन के माध्यम से प्रस्तुत किया, जिसमें अट्ठारह दिन का युद्ध समाप्त होने के बाद दुर्योधन और उसकी पत्नी भानुमति संवाद, माता गांधारी का दुर्योधन को आशीर्वाद से लेकर दुर्योधन वध तक दृश्य अपने चित-परिचित अंदाज में पंडवानी गायन के माध्यम से प्रस्तुत किया । 

          सुश्री शांतिबाई चेलक ने विगत चालीस वर्षों से निरंतर पंडवानी लोकगायन प्रस्तुत करती आ रही हैं। आपने लोकगायन की शिक्षा अपने पिता श्री आशाराम बघेल से ग्रहण की । आप देश के विभिन्न प्रतिष्ठित मंचों पर अपनी प्रस्तुति दे चुकी हैं| छत्तीसगढ़ राज्य से आपको गुरू घासीदास चेतना पुरस्कार प्राप्त है।  

          प्रस्तुति में मंच पर- मंजीरे व सहगायन में श्री राजीव एवं श्री लखनलाल, हारमोनियम पर श्री अवधराम, तबले पर श्री शिवलाल, नाल पर श्री नीलेश, बेन्जो पर श्री विश्राम एवं झुमके पर श्री पंचराम ने संगत दी | 

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