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वन विभाग में नौकरशाही बे-लगामः विधानसभा में घोषणा का अब तक अमल नहीं
जंगल महकमा में चहेते अफसरों पर नौकरशाही कार्रवाई करने में मनमर्जी करता है। इसका ताजा उदाहरण विधानसभा के पिछले सत्र में वन मंत्री विजय शाह द्वारा वनीकरण क्षतिपूर्ति घोटाले में फंसे दक्षिण सागर वन मंडल के डीएफओ नवीन गर्क को हटाने की घोषणा पर तीन महीने बाद भी अमल नहीं होना है। दिसंबर के सत्र के बाद अब तक विभाग की दो बार तबादला सूची भी जारी हो चुके हैं लेकिन गर्ग अभी भी वहीं के वहीं बने हैं। अपनी घोषणा पर अमल नहीं होने पर पिछले दिनों वन मंत्री शाह आला अधिकारियों पर बिफरे थे क्योंकि बजट सत्र में फिर यह मामला उठाया जा सकता है।
वन विभाग वनीकरण क्षतिपूर्ति में हुई गड़बड़ी मैं दोषी करार दिए गए दक्षिण सागर वन मंडल के डीएफओ नवीन गर्ग को हटाने संबंधित प्रस्ताव वन मंत्री विजय शाह के विधानसभा में दिए गए आश्वासन के बाद आज तक मंत्रालय नहीं पहुंचा जबकि वन मंत्री विजय शाह के आश्वासन के बाद बहुउद्देशीय परियोजना के डूब क्षेत्र में आई वन भूमि के बदले में गैर वनभूमि और बिगड़े वन में पौधारोपण कराने में हुई गड़बड़ी में दक्षिण मंडल में पदस्थ रहे प्रशांत कुमार सिंह, एमएस उईके और वर्तमान डीएफओ नवीन गर्ग को दोषी माना गया है। इनमें से प्रशांत कुमार सिंह को दक्षिण सागर से हटाकर खरगोन और एमएस उईके को दमोह पदस्थ कर दिया गया है जबकि नवीन गर्ग अभी भी दक्षिण सागर वन मंडल में पदस्थ है। दिलचस्प पहलू यह है कि वन मंत्री शाह के कहने पर आला अफसरों ने एमएस उईके तत्कालीन प्रभारी डीएफओ दक्षिण सागर वन मंडल को क्लीन चिट दे दी है जबकि नवीन गर्ग को उसी मसले में आरोपों के घेरे में खड़ा कर दिया है।
लौटती डाक से भेजा था प्रस्ताव
मंत्रालय में पदस्थ उप सचिव अनुराग कुमार ने पीसीसीएफ कैंपा को 19 दिसंबर को एक पत्र लिखकर ‘लौटती डाक से प्रस्ताव शासन को भेजने के लिए निर्देश दिए हैं। यानी पत्र मिलने के साथी नवीन घर को हटाने संबंधित प्रस्ताव शासन को भेजा जाना था किंतु 3 महीने बाद भी प्रस्ताव सतपुड़ा मुख्यालय से मंत्रालय नहीं पहुंचा। सूत्रों ने बताया है कि विभागीय जांच करने वाले अफसर ने नवीन गर्ग को लघु शासित से दंडित करने की सिफारिश की है।
इन अफसरों को अभयदान देने के प्रयास
आरपी राय : राय के खिलाफ 10 जून 19 को आरोप पत्र जारी हुआ था। आरोप था कि वन मंडल इंदौर के अंतर्गत वन परीक्षेत्र चोरल में बड़े पैमाने पर अवैध कटाई हुई थी। जांच के दौरान राय अपने दायित्वों का निर्वहन करने में असफल रहे इसके कारण 6 लाख 93 हजार 361 रुपए की राजस्व हानि हुई थी। अभी इनसे वसूली नहीं हुई है. मामला विभाग में ही ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है।
बृजेंद्र श्रीवास्तव : श्रीवास्तव के खिलाफ 21 जुलाई 22 को नियम दस के तहत आरोप पत्र जारी किया गया था। इन पर आरोप था कि स्थानांतरण नीति के विरुद्ध जाकर कर्मचारियों के तबादले किए। आरोप पत्र का जवाब अभी तक नहीं दिया गया है। इनका तबादला वन मंत्री शाह की सिफारिश पर ग्वालियर से पूर्व छिंदवाड़ा वन मंडल जैसे महत्वपूर्ण वन मंडल में कर दिया गया है।
एपीएस सेंगर: सेंगर के खिलाफ 24 अगस्त 22 को आरोप पत्र जारी हुआ। मामला तब का है जब वे टीकमगढ़ के डीएफओ हुआ करते थे। इन पर आरोप है कि भंडार क्रय नियमों का पालन नहीं किया। खरीदी में गड़बड़ी हुई। अभी तक प्रशासन-एक ने इनके खिलाफ कार्रवाई करने की अद्यतन स्थिति से शासन को अवगत नहीं कराया है।
भारत सिंह बघेल : आरोप पत्र 22 मई 2006 को जारी किया गया। बघेल ने अपने प्रभाव अवधि के दौरान पूर्व लांजी की के प्रभाव अवधि में राहत कार्य अंतर्गत कार्यों में बड़ी गड़बड़ी की गई थी। इनके खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा कर मामला संघ लोक सेवा आयोग को भेजा है. शासन को संघ लोक सेवा आयोग के उत्तर की अपेक्षा है।
प्रशांत कुमार : आरोपपत्र 4 सितंबर 2020 को जारी किया गया. प्रशांत कुमार डीएफओ पश्चिम बैतूल वन मंडल में अनियमितता के मामले में जांच हुई। जांच में दोषी पाया गया। विभाग ने एक वेतन वृद्धि असंचयी प्रभाव से रोके जाने का दंड आरोपित कर अंतिम निर्णय के लिए संघ लोक सेवा आयोग भेजा है. आयोग से अभी तक अभिमत नहीं आ पाया है।




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