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वनकर्मियों की सेवा को वन सुरक्षा बल घोषित किया जाए
पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजयसिंह ने कहा है कि वन और वन्य प्राणी हमारे प्राकृतिक तीर्थ हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह से मांग की है कि जिस तरह जनता की सुरक्षा करते हुए जान गंवाने पर पुलिस कर्मियों को शहीद का दर्जा दिया जाता है, ठीक उसी तरह वनों की सुरक्षा मंे लगे वन कर्मियों की जंगली जानवरों या वन माफियाओं के हमले से मृत्यु होने पर उन्हें शहीद का दर्जा दिया जाए। शहीद होने पर उनके परिवार को दी जाने वाली विशेष अनुग्रह राशि दस लाख से बढ़ाकर पच्चीस लाख की जाए। साथ ही पुलिस बल के समान वन कर्मियों की सेवा को “वन सुरक्षा बल” घोषित किया जाए।
अजयसिंह ने कहा है कि प्रदेश में जंगल और वन्य प्राणियों की सुरक्षा में लगे मैदानी अमले पर लगातार खुले आम हो रहे हमले गम्भीर चिंता का विषय हैं। भाजपा की शिवराज सरकार इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रही है। सरकार के असंवेदनशील रवैये से वन रक्षक से लेकर रेंजर तक तमाम वन कर्मी हताश और दुखी हैं। भाजपा शासन में अमान्य वन अधिकार दावे जबरन मान्य किये जा रहे हैं। जिससे वनकर्मियों के साथ विवाद की घटनाएं बढ़ रही हैं। भाजपा शासन काल में पनपे वन माफिया के लोग उन पर जानलेवा हमले कर रहे हैं। वन विभाग के मैदानी अमले में रोष व्याप्त है। वे चन्दा करके मृतकों के परिवारों की आर्थिक सहायता कर रहे हैं।
अजयसिंह ने कहा कि विगत 14 अगस्त को पन्ना में डयूटी के दौरान रेंजर श्री बिंदेश्वरी राम भगत शहीद हो गए लेकिन उनके परिवार को 12 साल पुराने एक आदेश के अनुरूप दस लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी गई, जो काफी कम है। अन्य राज्यों में यह राशि तीस लाख दी जाती है। कर्नाटक राज्य इसका उदाहरण है। उन्होंने कहा कि नौकरी के दौरान अपने घरों से लगातार दूर रहने वाले प्रदेश के वन विभाग के तमाम मैदानी अमले के प्रति शिवराज सिंह को संवेदनशीलता का परिचय देना चाहिए ताकि वे अपनी ड्यूटी पूरे उत्साह, आत्मविश्वास और लगन से कर सकें।




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