लोकराग समारोह के प्रथम दिवस गायन एवं नृत्य प्रस्तुति हुई

जनजातीय लोक कला एवं बोली विकास अकादमी, मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद् की ओर से लोक नृत्य एवं गायन पर केंद्रित तीन दिवसीय लोकराग समारोह 24 से 26 सितंबर 2021 तक आयोजित किया गया है। समारोह में आज प्रथम दिवस राजगढ़ के प्रेमसिंह देपालपुरिया और साथियों द्वारा कबीर गायन एवं सागर के अरविन्द यादव और साथियों द्वारा बधाई एवं नौरता नृत्य की प्रस्तुति दी गई। समारोह का प्रसारण विभाग के यूट्यूब चैनल https://youtu.be/NC6BAphuZ3E और फेसबुक पेज https://www.facebook.com/events/385539229697954/?sfnsn=wiwspwa पर लाइव प्रसारित किया गया।

प्रस्तुति की शुरूआत प्रेमसिंह देपालपुरिया और साथियों द्वारा कबीर गायन से हुई। जिसमें उन्होंने हे रे भरयो राम रस कांसो, रे भंवरा…,सदगुरू जी महाराजा मो पे साईं रंग डारा है…, बात बसे सोई झूठा, पंड़ित भाई …, लटको छोड़ दे रे मनवा असल फकीरी धार…, करता करम से न्याय रे साधु भाई…,मत बांधों गठरिया गो जस की…, कबीर पदों की प्रस्तुति दी। अंत में कलाकारों ने कबीर पद कहता जा जो जी, म्हारा सासरिया हाल…, से अपनी प्रस्तुति को विराम दिया। मंच पर हारमोनियम एवं गायन में प्रेमसिंह देपालपुरिया,मंजीरे पर पंकज मालवीय, वायलिन पर संतोष सरोलिया, तंबूरा पर हरिओम मालवीय, ढोलक पर मनोज गोराबत, टिमकी पर सचिन मालवीय, करताल पर कृष्ण मोहन देपालपुरिया ने संगत की।

दूसरी प्रस्तुति अरविन्द यादव और साथियों द्वारा बधाई एवं नौरता नृत्य की दी गई। बधाई नृत्य में कलाकारों ने नैना बंध लागे कहियो न…,जनम लियो रघुरैया…,सागर को पानी अढ़ाई मटका…, कतलो नें फूटे धमाको नें होय…, टूटी टपरिया की झांकी दिखाएं…,ठाणे रहियो मनमोहन…, गीतों पर नृत्य प्रस्तुत किया। बधाई नृत्य बुंदेलखंड का प्रसिद्ध लोक नृत्य है। देवी-देवताओं के समक्ष, शादी-विवाह एवं जन्म जैसे खुशी के अवसरों पर यह नृत्य किया जाता है। इसके बाद नौरता नृत्य में कलाकारों ने आगईं -आगईं रे माई नौ दुर्गा…, नौरता के गाँव में राधा रानी आईं है…,हमारे गोद की आईं देखो जाईं देखो…,हिमाचल जू की कुँवर लड़ाई…, दल आवें माई के दल आवें…, वीरा ओरी बनके सजो मलिनिया नदनवन के…, आदि गीतों पर प्रस्तुति दी गई। नौरता नवरात्र के समय किया जाने वाला नृत्य है। यह नृत्य कुंवारी कन्याओं द्वारा किया जाता है। सुआटा नाम का राक्षस कुंवारी कन्याओं को ले जाकर उनका वध कर देता था। उसके अत्यातार से मुक्ति के लिए कन्याओं ने देवी की आराधना की, तब माँ जगदँबा प्रकट होकर सुआटा राक्षस का वध करती हैं। तब से कुँवारी कन्याएं यह नृत्य करती आ रही हैं और अच्छे जीवन साथी की प्राप्ति की कामना भी करती हैं। इस नृत्य में ढप, नगड़िया, लोटा, ढोलक, बांसुरी आदि लोक वाद्यों का प्रयोग किया जाता है।

तीन दिवसीय लोकराग समारोह के द्वितीय दिवस 25 सितम्बर को भोपाल के फूलसिंह माडरे और साथियों द्वारा बुन्देली गायन एवं उज्जैन की प्रतिभा रघुवंशी एवं साथियों द्वारा मटकी नृत्य की प्रस्तुति दी जाएगी।

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