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लोकतंत्र को सशक्त बनाने के लिए जरूरी है दायित्वबोध: सिंह
भारतीय प्रशासनिक सेवा (मध्यप्रदेश संवर्ग) 2019 बैच के परीवीक्षाधीन अधिकारियों ने विधानसभा भवन पहुँच कर विधायिका एवं विधासभा सचिवालय की कार्यप्रणाली का अध्ययन किया। इस अवसर पर विधानसभा के प्रमुख सचिव अवधेश प्रताप सिंह ने परीवीक्षाधीन अधिकारियों को मार्गदर्शन भी प्रदान किया।
परीवीक्षाधीन अधिकारियों को विधानसभा की कार्यप्रणाली से अवगत कराते हुए प्रमुख सचिव श्री सिंह ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विधानपालिका और कार्यपालिका दोनों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। निर्वाचित जनप्रतिनिधि हो या कार्यपालिका के अधिकारी सभी को अपने दायित्वों का बोध होना अत्यंत आवश्यक है। सशक्त लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए आवश्यक है कि हम सभी अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन पूरी ईमानदारी से करें।
श्री सिंह ने परीवीक्षाधीन अधिकारियों को बताया कि विधानपालिका में संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप शासन को चलाने के लिए नियम एवं कानून बनाए जाते हैं तथा राज्य के विकास एवं जनकल्याण की योजना के लिए आर्थिक प्रावधान हेतु बजट की व्यवस्था भी की जाती है। विधायिका द्वारा निर्मित योजनाओं, नियमों एवं व्यवस्थाओं के माध्यम से प्रदेश का समुचित विकास हो और जनकल्याणकारी योजनाओं का सफलतापूर्वक क्रियान्वयन हो सके इसकी जिम्मेदारी कार्यपालिका की होती है।
श्री सिंह ने परीवीक्षाधीन अधिकारियों को विधानसभा कार्यवाही के अंतर्गत प्रश्नकाल,ध्यानाकर्षण, शून्यकाल, स्थगन प्रस्ताव जैसी महत्पूर्ण प्रक्रियों के बारे में सूक्ष्मता से बताया। श्री सिंह ने बताया कि प्रश्नकाल विधानसभा की सबसे महत्पूर्ण प्रक्रिया में से एक है। इसके अंतर्गत निर्वाचित विधायक अपने क्षेत्र की समस्याओं से संबंधित प्रश्न सरकार के मंत्रियों से पूछते हैं, एवं सदन में मंत्री उनका जवाब देते हैं। श्री सिंह ने तारांकित एवं अतारांकित प्रश्नों के बारे में भी परीवीक्षाधीन अधिकारियों को बताया।
इस अवसर पर प्रशासन अकादमी की संचालक श्रीमती सोनाली पोक्षे वायंगणकर, संचालक-वित्त श्री नितिन नांदगांवकर एवं परीवीक्षाधीन अधिकारीगण सर्वश्री अक्षत जैन, आकाश सिंह, दलीप कुमार, श्रीमती गुन्चा सनोबर, हिमांशु प्रजापति, श्रीमती काजल जावला, नवजीवन विजय पंवार,श्रीमती निधि सिंह, श्रेयांश कुमट एवं सुश्री सृष्टि जयंत देशमुख उपस्थित थे।




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