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रोजी-रोटी की तलाश में विस्थापन को नाटक में दिखाया गया

मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय में रंगप्रयोगों के प्रदर्शन की साप्ताहिक श्रृंखला ‘अभिनयन’ में आज जैनेन्द्र दोस्त (छपरा) द्वारा निर्देशित भोजपुरी लोकनाट्य ‘बिदेसिया’ का प्रसारण संग्रहालय के यूट्यूब चैनल http://bit.ly/culturempYT पर हुआ| बिदेसिया भिखारी ठाकुर का सबसे प्रसिद्ध नाटक है| इस नाटक का मुख्य विषय विस्थापन है। इस नाटक में रोजी-रोटी की तलाश में विस्थापन, घर में अकेली औरत का दर्द, शहर में पुरुष का पराई औरत के प्रति मोह को दिखाया गया है।
बिदेसिया कि कहानी में गाँव का एक युवक (बिदेसी) शादी के बाद अपनी नवब्याहता पत्नी (प्यारी सुंदरी) को छोड़कर रोजी-रोटी के लिए कलकत्ता धन कमाने चला जाता है। कलकत्ता में बिदेसी एक रूपवती स्त्री रखेलिन के चक्कर में फँस जाता है तथा अपनी पत्नी प्यारी सुंदरी को भूल जाता है। उधर गाँव में प्यारी सुंदरी पति कि याद में रोती-कलपती रहती है और अपना दुःख कलकत्ता कमाने जा रहे बटोही को सुनाती है। बटोही उसे आश्वस्त करता है कि वो उसके पति तक उसका संदेश अवश्य ही पहुंचाएगा। बटोही कलकत्ता चला जाता है।
कलकत्ता पहुँचने के बाद बटोही बिदेसी को उसकी पत्नी प्यारी सुंदरी की स्थिति से अवगत कराता है। बिदेसी की चेतना लौटती है, वह घर लौटने का निश्चय करता है। रखेलिन भी कलकत्ता से अपने दोनों बच्चों के साथ बिदेसी के गाँव पहुँचती है। हाँ-ना और अनुनय-विनय के बाद सभी हिलमिल कर गाँव में साथ रहने लगते हैं।
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