राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 गुरु-शिष्य परंपरा का करेगी पुनरुत्थान : बरतूनिया

परिवेश पहले 100 – 50 वर्ष में बदलता था वह अब प्रतिदिन प्रतिफल बदलता जा रहा है हमारी संस्कृति में कहा जाता है कि जीवन नश्वर है, इस बात को व्यक्ति आज हर पल महसूस कर पा रहा है। इस बदलते परिवेश में लोगों का नजरिया भी उतनी ही तीव्र गति से बदल रहा है जितनी तीव्र गति से आज का समय और परिवेश बदल रहा है।
यह बात मामाजी माणिकचन्द्र वाजपेयी जन्म शताब्दी समारोह समिति के द्वारा “बदलता परिवेश और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020” विषय पर आयोजित ऑनलाइन परिचर्चा में केंद्रीय जनजाति विश्वविद्यालय विजयनगरम आंध्र प्रदेश के कुलपति प्रो. टीवी कट्टीमणि ने कही।

मामाजी माणिकचन्द्र वाजपेयी जन्म शताब्दी समारोह समिति के द्वारा कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर परिचर्चा का प्रसारण किया गया इस परिचर्चा में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित कुलपति प्रो टीवी कट्टीमणि जी ने कहा की राष्ट्रीय शिक्षा नीति ने आज आम व्यक्ति से लेकर शिक्षण के क्षेत्र से जुड़े हुए मनीषियों को सोचने का एक मौका दिया है।
आज के समय में जहां डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक, स्पेस साइंटिस्ट जैसे लोग इस बदलते परिवेश को समझने में असमर्थ साबित हो रहे हैं तो वही आज से हजारों वर्षों पहले हमारे ऋषि-मुनियों ने इस बदलते परिवेश को समझ लिया था। आज समय है कि हम हमारी भारतीय वैदिक परंपरा को समझें भारतीय ऋषि परंपरा को समझे क्योंकि आज के समय में यह हमारी जरूरत बन चुकी है और भारतीय ऋषि परंपरा को हमें समझने की जरूरत है यही राष्ट्रीय शिक्षा नीति का प्रतिपादन है।
प्रो टीवी कट्टीमणि ने कहा की बदलते परिवेश में समाज का हर चीज को देखने का नजरिया बदला है पहले जहां लोग वनवासियों को दूसरे नजरिए से देखते थे तो वही आज उसी जनजातीय समाज की जीवन शैली को हम अपना रहे हैं। जनजातीय समाज जिस प्रकार से पूर्व से ही भीड़भाड़ भरे इलाकों से दूर रहता था आज कोरोनावायरस के संकट समय में हम लोग भीड़-भाड़ से दूर रह रहे हैं। आज समय है कि हम पुनः भारतीय परंपराओं को समझें अपनी मातृभाषा को जीवित रखें यह हम सभी के लिए अत्यंत आवश्यक है और यही सभी चीजें राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का मुख्य उद्देश्य तथा इसका प्रतिपादन है।
उक्त कार्यक्रम की अध्यक्षता बाबा साहब भीमराव अंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय लखनऊ के कुलाधिपति डॉ प्रकाश बरतूनिया ने की अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में बरतूनिया ने कहा कि पहली बार किसी शिक्षा नीति को बनाने में आम लोगों की सहमति ली गई है। शिक्षा नीति को बनाने से पहले लगभग ढाई लाख लोगों से उनके सुझाव लिए गए हैं उनके मत अभिमत लिए गए।
इसका मुख्य उद्देश्य था कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में अधिक से अधिक जनभागीदारी हो। शिक्षा नीति में मुख्य रूप से गुरु शिष्य परंपरा को प्राथमिकता दी गई है हमारी संस्कृति में गुरुओं को भगवान के ऊपर रखा गया है ,लेकिन जैसे जैसे परिवेश बदलता गया वैसे वैसे गुरु शिक्षक, अतिथि शिक्षक , और संविदा और उसके बाद रोजदारी से लगने लगे जिससे गुरुओं का सम्मान दिन प्रतिदिन उनके पद से काफी कम मिलने लगा था। हर कोई आईएएस आईपीएस बनना चाहता था लेकिन एक समय में कोई भी व्यक्ति एक शिक्षक बनना पसंद नहीं करता था।
गुरु शिष्य परंपरा को पुनः हमारे दैनिक जीवन में स्थापित किया जा सके इस बात का राष्ट्रीय शिक्षा नीति में विशेष ध्यान रखा गया है शिक्षा नीति मैं शिक्षकों का भी विशेष ध्यान रखा गया है शिक्षकों के कम से कम स्थान्तरण हो जिससे वह अपने कार्य को सरलता से कर सकें इसके लिए नीति बनाई गई है नई शिक्षा नीति में शिक्षक पात्रता परीक्षा शुरू करने की व्यवस्था की गई है, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में महिलाओं छात्रों शिक्षकों का विशेष रूप से ध्यान रखा गया है। इस परिचर्चा के अंत में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जुड़े तमाम लोगों की जिज्ञासाओं का समाधान कार्यक्रम के मुख्य वक्ता और कार्यक्रम के अध्यक्ष दोनों ने ही की। कार्यक्रम में अतिथियों का आभार वरिष्ठ पत्रकार सुदेश गौड़ जी ने किया।

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