राष्ट्रीय विरोध दिवस पर में निजी व सार्वजनिक उद्योगों के कर्मियों का प्रदर्शन

आज देश के दस प्रमुख केन्द्रीय श्रमिक संगठनों के आह्वान पर देश में व्यापक विरोध कार्रवाईयों के साथ प्रदेश में भी जगह-जगह श्रमिको-कर्मचारियों ने जोरदार प्रदर्शन व विरोध सभाएं की। केंद्र की मोदी सरकार द्वारा सीधे मजदूरों के हड़ताल के अधिकार पर हमला करते हुए आयुध निर्माणी बोर्ड के निगमीकरण के विरोध में प्रतिरक्षा कर्मियों की हड़ताल को कुचलने के लिए ‘आवश्यक रक्षा सेवा अध्यादेश 2021 लागू करने के खिलाफ, इस विरोध दिवस का आह्वान सीटू, एटक, इंटक, एचएमएस, एआईयूटीयूसी समेत 10 केन्द्रीय श्रमिक संगठनों व स्वतंत्र कर्मचारी महासंघों ने किया था।

सेंटर ऑफ़ इंडियन ट्रेड यूनियन्स(सीटू) द्वारा जारी विज्ञप्ति में जानकारी दी गयी कि इस मौके पर जबलपुर स्थित आयुध निर्माणी कारखानों, पाथाखेड़ा, पेंच कन्हान, उमरिया, बीरसिंहपुर पाली, जमुना कोतमा, सिंगरौली आदि कोयला खदानो, गुना की एनएफ़एल, भोपाल स्थित भेल कारखाना एवं ग्वालियर, इंदौर, सतना, रीवा, शहडोल आदि प्रमुख नगरों व औद्योगिक केन्द्रों पर प्रदर्शन व विरोध सभाएं की गयी। मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव युनियन द्वारा भी प्रदेश भर में प्रदर्शन किया गया। प्रदेश भर के बीमा के दफ्तरों में भी बीमा कर्मचारियों ने इस अध्यादेश के साथ-साथ एलआईसी के शेयर बेचने और यूनाईटेड इंडिया इंश्योरेंस को बेचने के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। इन प्रदर्शनों व सभाओं में श्रमिक कोरोना प्रोटोकाल का पालन कर शामिल हुए।

इस अवसर पर भेल भोपाल की फैक्टरी गेट पर हुए प्रदर्शन को संबोधित करते हुए सीटू के प्रदेश महासचिव प्रमोद प्रधान ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार ने मजदूर वर्ग पर चौतरफा हमला छेड़ रखा है। 44 श्रम क़ानूनों को समाप्त कर चार काली श्रम संहिताओं के जरिये मजदूर वर्ग के अधिकारों व सुविधाओं पर सीधा हमला हो रहा है। अब आवश्यक रक्षा सेवा अध्यादेश के जरिये रक्षा समेत तमाम उद्योगों में कार्यरत श्रमिकों के हड़ताल के बुनियादी अधिकार पर ही हमला किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार कारपोरेटों की चाकरी में लगी है और सार्वजनिक उपक्रमों को ध्वंस कर उन्हें भी इन मुनाफाखोरों के हाथों में सौंपना चाहती है। सीटू महासचिव ने कहा कि आज इन सार्वजनिक उपक्रमों में भारी तादाद पर काम को ठेके पर दिया जा रहा है, पर इन ठेका श्रमिकों को उचित वेतन तक नहीं दिया जा रहा। उन्होंने किस बात पर रोष जाहिर किया कि ठेका श्रमिकों को न्यूनतम सुविधाएं भी नहीं दी रही है, पर उनसे पूरा काम लिया जा रहा है। इस लूट के खिलाफ ठेका श्रमिकों और स्थाई कर्मियों की व्यापक एकता बन रही है, तो सरकार श्रम कानूनों और हड़ताल के अधिकार पर ही हमला कर संघर्ष को दबाना चाहती है। उन्होंने कहा कि इस क्रूर अध्यादेश का प्रभाव केवल रक्षा क्षेत्र तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसके तानाशाही प्रावधानों को अन्य क्षेत्रों में भी लागू किया जा सकता है। यह अध्यादेश सभी श्रम अधिकारों को खत्म करने में काली श्रम संहिताओं के कुख्यात प्रावधानों से भी बहुत आगे निकल गया है। उन्होंने प्रदेश के श्रमिकों और कर्मचारियों को आह्वान किया कि वे मोदी सरकार की इस देशविरोधी व श्रमिक विरोधी नीति के खिलाफ संघर्ष तेज करें। 

प्रदेश के अन्य स्थानों पर हुए प्रदर्शनों को सीटू प्रदेश अध्यक्ष रामविलास गोस्वामी, प्रतिरक्षा कर्मियों के राष्ट्रीय नेता बिजन गुहा ठाकुरता, विष्णु शर्मा, मुकेश भदौरिया, महेश श्रीवास्तव, अमृतलाल विश्वकर्मा, ए के पटेल, पी एस पाण्डे, एन चक्रवर्ती, शैलेन्द्र शर्मा, आर एन शर्मा, इन्द्रपति सिंह, विनोद राय, देवेन्द्र निराला, संजय तोमर, वी एस रावल, गिरजेश सेंगर, कामेश्वर सिंह, जगदीश दिगरसे, अमर नाथ, अनवर, सौरभ मिश्रा आदि नेताओं ने संबोधित किया। विज्ञप्ति जारी होने तक प्रदेश भर से कार्रवाईयों के समाचार आ रहे थे।

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