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राष्ट्रव्यापी हडताल के दौरान प्रदर्शन कर प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन
आशा एवं आशा सहयोगियों को कर्मचारी का दर्जा देने, न्यूनतम वेतन देने, सुरक्षा उपकरण देने, लोगों की जान बचाने के लिये सार्वजनिक चिकित्सा व्यवस्था को मजबूत करने की मांग को लेकर अ.भा.आशा वर्कर्स कोर्डिनेशन कमेटी के द्वारा राष्ट्रव्यापी हडताल के आह्वान पर प्रदेश में ढाई दर्जन के करीब जिलों में अशा एवं सहयोगियों ने प्रदर्शन कर कलेक्टर, सीएमएचओ आदि के माध्यम से प्रधानमंत्री,मुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन में यूनियन ने भारतीय श्रम सम्मेलन ने अनुमोदन को लागू करनते हुये आशा एवं सहयोगियों को स्वास्थ्य कर्मी के रूप में नियमित करने, आशा को 21,000 एवं सहयोगी को 30,000 रु.न्यूनतम वेतन देन, भविष्य निधि, पेंशन सहित सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ देने की मांग की।
आज हडताल के दौरान आशा एवं सहयोगियों द्वारा प्रदेश के दो दर्जन से अधिक जिलों में कहीं सामूहिक रूप में एवं कहीं घरों में पोस्टर के साथ प्रदर्शन की कार्यवाहियां की। लॉकडाउन के दौरान हुयी यह हडताल में प्रदेश की जबलपुर, डिंडौरी, सिवनी, नरसिंहपुर, सीहोर, नीमच, मंदसौर, रतलाम, उज्जैन, रतलाम, गुना आदि एक दर्जन जिले में सामूहिक रूप से कलेक्टर एवं सीएमएचओ के माध्यम से एवं 5 जिलों में यूनियन के पदाधिकारियों ने बीएमओ के माध्यम से 8 जिलों में ईमेल के माध्यम से प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।
सरकारें जमकर लूट रही है आशा एवं सहोगिों को
कोरोना काल में अस्पतालों में डाक्टर, नर्स, वार्ड बाय, सफाई मजदूर, पेरा मेडिकल स्टाफ अस्पताल के अंदर अपनी जान को जोखिम में डाल कर लोगों की जान बचाने के लिये सराहनीय काम कर रही है, उन्हें शासकीय कर्मी के रूप में वेतन मिलते है। लेकिन गांव एवं शहर में संक्रमण को रोकने के लिये, घर घर जाकर सर्वे करने, कोरोना का लक्षण मिलने पर उन्हें दवा देने, कोरोन्टाइन करने, आराम न मिलने पर अस्पताल भेजने का काम आशा एवं सहयोगी कर रही है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में मैदान में अपनी और परिवार की जान को जोखिम में डाल कर काम कर रही आशाओं को सरकार मात्र 2000 रुपये वेतन देते है। इस भुखमरी वेतन भी सरकार 3-4 माह विलम्ब से देते है। इस तरह केन्द्र एवं राज्य सरकार आशाओं का अमानवीय शोषण कर रहे है। सरकार आशाओं को संगठित होने से रोक कर, गुलाम बनाकर,उनकी आवाज को दबाने का प्रयास कर रहे है। संचालक,एन.एच.एम. भारत सरकार ने वर्षों पूर्व केन्द्र सरकार से आशाओं को आंगनवाडी कर्मियों की तरह मानदेय देने के आग्रह किया था, लेकिन सरकार ने नही माना। अधिंकांश राज्य सरकारें अपनी ओर से आशाओं को वेतन दे रही है, आन्ध्र में 10,000 रु.के वेतन में 8000 राज्य का हिस्सा है, केरल में 9000 रु.वेतन दे रहे है, लेकिन म.प्र. सरकार आशाओं को कुछ नही दे रहे है। महिलाओ के सम्मान की बात करने वाली केन्द्र व राज्य सरकारें खुद महिला कर्मियों का जमकर आर्थिक व सामाजिक शोषण कर रही है।
सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करो-निजीकरण बंद करो
इस हडताल की प्रमुख मांगों में सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं का निजीकरण को रोकने एवं सार्वजनिक चिकित्सा व्यवस्था को मजबूत करने की है। सरकार आयुष्मान, डिजिटल इंडिया आदि योजनाओं को जनता के लिये लाभदायक बताकर स्वास्थ्य सेवाओं को निजी क्षेत्र के हवाले कर रहे है। कोरोना काल में निजी अस्पतालों मेें इन योजनाओं में काविड मरीजो का इलाज से इंकार की एवं मरीजों एवं परिजनों को जमकर लूटा और वसूली के लिये लाशें तक कब्जा कर बैठा। हजारों लोग अस्पताल में बेड, आक्सीजन, वेन्टीलेटर, दवा के बिना दम तोड दिये और कई लागों ने नकली दवाओं के चलते दम तोडे। आक्सीजन, वेन्टीलेटर, दवाओं का जमकर कालाबजारी हुयी, इससे भी लोगों की जान गयी। इसलिये यह स्पष्ट हो गया कि आम लोगों की जीवन की रक्षा के लिये सरकारी अस्पतालों को, सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की जरूरत है। इसलिये मांग की है कि सरकारी अस्पतालों में पर्याप्त मात्रा में बिस्तर, आक्सीजन, वेंटीलेटर, दवाओं के साथ पर्याप्त संख्या में डाक्टर्स, नर्सेस, अन्य स्टाफ की नियुक्ति की जावे।
निश्चित समयसीमा में सभी को नि:शुल्क वैक्सिनेशन करो
यह स्पष्ट हो गया कि कोरोना महामारी से लोगों को बचाने का एकमात्र रास्ता वैक्सीनेशन है। लेकिन वैक्सीनेशन की गति बेहद धीमी पडने लगी है। सरकार की वैक्सीन नीति के चलते अब लोागों को वैक्सीन कब मिलेगा इसको लेकर आशंका है। इसलिये देश की वैक्सीन बनाने वाला सार्वजनिक क्षेत्र व निजी दवा कम्पनियों सहित सभी क्षमता का इस्तेमाल कर अधिक से अधिक वैक्स्ीन का उत्पादन बढाकर एक निश्चित समयसीमा में सभी को नि:शुल्क वैक्सीनेशन सुनिश्चित करने की मांग यूनियन ने की है। हडताल की पूर्व संध्या में आशाओं ने प्रदेश भर में मशाल के साथ प्रदर्शन किया।




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