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रावण वध और राज्याभिषेक के प्रसंगों के साथ रामलीला का समापन
संस्कृति विभाग द्वारा रवींद्र भवन में आयोजित पांच दिवसीय रामलीला का आज शुक्रवार को समापन हो गया। रंगरेज कला संस्कार उज्जैन द्वारा प्रस्तुत इस रामलीला में समापन दिवस हनुमान का सीता जी से मिलकर लौटना, रामचंद्र जी को सभी विवरण से अवगत कराना तथा इसके पश्चात सेतुबंध की परिकल्पना, इधर रावण के दरबार में उसके अहंकार का प्रदर्शन तथा विभीषण एवं अन्य सामंजस्य के पक्षधर लोगों के अपमान के प्रसंग प्रस्तुत हुए।रावण द्वारा निरंतर अच्छे परामर्श और राम से क्षमा मांगने के सुझावों को अमान्य कर देने के कारण यह स्थिति बनी कि अब राम और रावण का युद्ध ही अंतिम विकल्प है। निर्णायक युद्ध के पूर्व रावण के भाई कुंभकरण एवं पुत्र मेघनाथ से लड़ाई के साथ ही लक्ष्मण शक्ति, फिर दोनों असुरों के वध के
प्रसंग भी आयोजन स्थल पर बैठे हजारों दर्शकों ने देखे तथा समय-समय पर उत्साहवर्धन प्रदर्शित किया।
आज भी सभी दिनों की तरह बड़ी संख्या में दर्शकों की भागीदारी रही। अंतिम समय जब राम रावण का युद्ध हो रहा था उस समय वातावरण में रोमांच देखते ही बनता था। जब राम ने विभीषण के परामर्श से रावण की नाभि पर तीर मार कर उसका वध किया तब उपस्थित दर्शक समाज ने करतल ध्वनि से राम
की विजय का स्वागत किया। इसके पश्चात राम का अयोध्या लौटना तथा राज्याभिषेक होना भावपूर्ण प्रसंग थे। इस प्रसंग से रामलीला सम्पन्न हुई। संस्कृति विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री मनोज श्रीवास्तव ने राज्याभिषेक के अवसर पर आरती की तथा सभी कलाकारों का परिचय प्राप्त करके उन्हें
पुष्प भेंट कर उनका आभार व्यक्त किया।
आज समापन अवसर पर पूरी रामलीला देख कर प्रस्थान करते दर्शकों की खुशी का पारावार ना रहा जब राज्याभिषेक के अवसर पर अयोध्यावासियों द्वारा खुशी बनाए जाने और मिठाई बांटे जाने के प्रतीक स्वरूप लड्डू का वितरण किया गया। यह रामलीला लंबे समय तक दर्शकों की स्मृतियों में अपनी अनेक खूबियों के कारण याद की जाती रहेगी। विशेष रूप से अत्याधुनिक परिवेश में, श्रेष्ठ पटकथा, संवाद, वेशभूषा, मेकअप और मंच निर्माण और प्रतिदिन परिवर्तन, परिमार्जन कर प्रसंगों को सार्थक किया गया।




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