राजमाता के व्यक्तित्व से छलकता था मातृत्व : गृह मंत्री

गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने ग्वालियर में राजमाता स्व. विजयाराजे सिंधिया की श्रद्धांजलि सभा में दिये उदबोधन में कहा कि अम्मा जी महाराज के व्यक्तित्व से ही मातृत्व छलकता था। रविवार को अम्माजी महाराज की छत्री पर राजमाता सिंधिया की 102वीं जयंती पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन हुआ। सभा में राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे सिंधिया, खेल एवं युवा
कल्याण मंत्री श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया, पूर्व मंत्री श्रीमती माया सिंह, श्री जयभान सिंह पवैया, श्री
बालेन्दु शुक्ल, पूर्व महापौर श्रीमती समीक्षा गुप्ता, श्री कमल माखीजानी, श्री कौशल शर्मा, संत श्री
ढोलीबुआ महाराज व संत श्री संतोष गुरू सहित वरिष्ठ जन-प्रतिनिधियों और गणमान्य नागरिकों ने
अम्माजी महाराज के प्रति अपने श्रद्धासुमन अर्पित किये।

गृह मंत्री डॉ. मिश्रा ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि राजमाता ने शासकों में उपासक
बनकर जीवन व्यतीत किया। वे सांस्कारिक विकारों के मध्य निरविकार थीं। उन्होंने अपनी जनता के
प्रति जीवन समर्पित कर दिया, इसलिए वे अम्माजी महाराज कहलाई। डॉ. मिश्रा कहा कि राजमाता
का जीवन हमें सभी के लिये प्रेरणादायी है। राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार श्री भारत सिंह कुशवाह ने अपने
उदबोधन में जनता के प्रति राजमाता के वात्सल्य व स्नेह को रेखांकित किया।
सांसद श्री विवेक नारायण शेजवलकर ने कहा कि राजमाता स्व. विजयाराजे सिंधिया विलक्षण
व्यक्तित्व की धनी थीं। वे जैसा बोलती थीं उसी के अनुसार अपना आचरण भी करती थीं। पूर्व मंत्री
श्री जयभान सिंह पवैया ने कहा कि दौलत व सत्ता लक्ष्मी की तरह चंचला होती है। राजमाता इस बात
को भली भाँति समझती थीं। उन्होंने सदैव जनता की सेवा को तपस्या माना। राजमाता भारतीय
सामाजिक जीवन में एक महान हस्ती थीं।

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