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राजनीति में लोग पैसा कमाने संपत्ति बचाने और संपत्ति बढ़ाने आने लगे हैं
राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद ने मध्यप्रदेश विधानसभा में रविवार को प्रबोधन कार्यक्रम में कहा कि पहले राजनीति में आने वाले लोग परिवार तक को भूल जाते थे आज जो राजनीति में आ रहे हैं वह पैसा कमाने संपत्ति बढ़ाने और संपत्ति बचाने के लिए आ रहे हैं. राजनीति में आने वाले पहले उससे प्यार करते थे. मगर आज ऐसे लोगों की कमी होती जा रही है इसके कारण राजनीति का क्षेत्र बदनाम हो रहा है.
गुलाम नबी आजाद ने विधानसभा भवन में नवनिर्वाचित विधायकों को संबोधित करते हुए कहां कि उन्होंने अपने परिवार और रिश्तेदारों को राजनीति से दूर रखा. कभी उन्हें अपने ऑफिस तक का रास्ता नहीं दिखाया. आजाद में नवनिर्वाचित विधायकों को लंबा राजनीतिक जीवन बनाने के लिए कुछ टिप्स भी दिए. उन्होंने बताया कि अपने आसपास बिचौलियों को नहीं पनपने दें . उनके कारण ही बदनामी होती है. उनकी गतिविधियों के कारण विधायक मंत्री की छवि बिगड़ती है. अपने क्षेत्र पर लगातार नजर रखें लोगों से ज्यादा से ज्यादा मिले. चुनाव जीतने के बाद क्षेत्र में जीवंत संपर्क रखें क्योंकि 90% लोगों की शिकायत रहती है कि चुनाव जीतने के बाद उन्होंने सांसद और विधायक का चेहरा ही नहीं देखा. अपने क्षेत्र के हर मतदाता का काम करें. दूसरे दल या दूसरे धर्म का व्यक्ति कोई अगर काम लेकर आता है तो उसका सबसे पहले काम करें क्योंकि उसका भरोसा आप पर बना रहेगा वह किसी भरोसे पर ही आपके पास आया है.
प्रबोधन कार्यक्रम में लोकसभा सचिवालय के महासचिव रहे सुभाष काश्यप ने विशेषाधिकार हनन को लेकर नवनिर्वाचित विधायकों को कई उदाहरणों के साथ मुद्दे की बात कही. उन्होंने बताया कि विशेषाधिकार हनन जनता और पुलिस के खिलाफ लाने से बचें. विशेष अधिकार को लेकर कश्यप ने बताया कि सदन की कार्यवाही यह समिति की बैठक में शामिल होने से रोकने के लिए बैठे क्या कार्रवाई की 40 दिन पहले या 40 दिन बाद ऐसा कृत्य करता है तो उसके खिलाफ विशेषाधिकार हनन बनता है. कश्यप से विधायकों ने कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों द्वारा आमंत्रण और बैठक बैठने की व्यवस्था ने प्रोटोकॉल का पालन नहीं होने पर विशेषाधिकार हनन का मामला बनने या ना बनने के बारे में भी सवाल किए.
कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने प्रश्नकाल को लेकर नवनिर्वाचित विधायकों को लाइब्रेरी में ज्यादा से ज्यादा समय बिताने, अपडेट रहने, प्रश्नोत्तरी का अच्छे से अध्ययन करने, पूरक प्रश्न तयार करने आदि पर भाषण दिया. दिग्विजय सिंह ने विधायकों की सवालों के जवाब भी दिए. उनके अनुज और कांग्रेस विधायक लक्ष्मण सिंह ने उनसे जब सरकार द्वारा लिए जा रहे कर्ज को रोकने का सवाल किया. लक्ष्मण सिंह ने उन्हें मुख्यमंत्री के सलाहकार बताते हुए यह सवाल किया तो दिग्विजय सिंह ने कहा कि वे सरकार के अंग नहीं है अगर आपको सवाल का तरीका पूछना है तो बताएं.
कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष नर्मदा प्रसाद प्रजापति और केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी मेरे विचार रखें.




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