रवां है एक चश्मे से दो धारे,सगी बहनें हैं दो, हिंदी और उर्दू

आजादी के 75 वर्ष के अवसर पर अमृत महोत्सव के अंतर्गत मध्य प्रदेश उर्दू अकादमी, संस्कृति परिषद, संस्कृति विभाग द्वारा प्रदेश में संभागीय मुख्यालयों पर नवोदित रचनाकारों पर आधारित “तलाशे जौहर” कार्यक्रम सम्पन्न होने के बाद अब ज़िला मुख्यालयों पर स्थापित एवं वरिष्ठ रचनाकारों के लिए “सिलसिला” के अंतर्गत कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं। इस कड़ी का तेरहवां कार्यक्रम दमोह में 14 सितंबर को “शेरी व अदबी नशिस्त” का आयोजन ज़िला समन्वयक अदीब दमोही के सहयोग से किया गया। 

अकादमी की निदेशक डॉ. नुसरत मेहदी के अनुसार उर्दू अकादमी द्वारा अपने ज़िला समन्वयकों के माध्यम से प्रदेश के सभी ज़िलों में आज़ादी का अमृत महोत्सव के तहत “सिलसिला” के अन्तर्गत व्याख्यान, विमर्श व काव्य गोष्ठियाँ आयोजित की जा रही हैं। ज़िला मुख्यालयों पर आयोजित होने वाली गोष्ठियों में सम्बंधित ज़िलों के अन्तर्गत आने वाले गाँवों, तहसीलों, बस्तियों इत्यादि के ऐसे रचनाकारों को आमंत्रित किया जा रहा है जिन्हें अभी तक अकादमी के कार्यक्रमों में प्रस्तुति का अवसर नहीं मिला है अथवा कम मिला है। इस सिलसिले के बारह कार्यक्रम भोपाल, खण्डवा, विदिशा, धार, शाजापुर  टीकमगढ़, सागर एवं सतना, रीवा, सतना सीधी, रायसेन, सिवनी, नरसिंहपुर एवं नर्मदापुरम में आयोजित हो चुके हैं और आज यह कार्यक्रम दमोह में आयोजित हुआ जिसमें दमोह ज़िले के रचनाकारों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत प्रस्तुत कीं।

19 शायरों और साहित्यकारों ने शिरकत की
दमोह ज़िले के समन्वयक अदीब दमोही ने बताया कि दमोह में आयोजित साहित्यिक गोष्ठी में 19 शायरों और साहित्यकारों ने शिरकत की। कार्यक्रम की अध्यक्षता दमोह के वरिष्ठ शायर किशोर तिवारी केशू गुरू ने की, मुख्य अतिथि के रूप में वरिष्ठ समाजसेवी अनवार उस्ताद एवं विशेष अतिथियों  के रूप में शफीक़ उस्ताद, हाजी अहमद अली बाबू तथा वाहीद क़ुरैशी मंच पर उपस्थित रहे। 

जिन शायरों ने अपना कलाम पेश किया उनके नाम और अशआर इस प्रकार हैं। 
किशोर तिवारी “केशू गुरू” सर झुकाना और कटाना एक मत समझो मियां,हक़ परस्ती और है और हक़ बयानी और है।
हाजी ताहिर दमोही माँ की ममता प्रेम पिता का हमने जाना हिंदी से। भाई-बहिन के प्यार को भी हमने पहचाना हिंदी से।। 
शाहिद दमोही मिलेगी एक जैसी जाज़बीयत,कि चाहे जब पढ़ो हिंदी और उर्दू।रवां है एक चश्मे से दो धारे,सगी बहनें हैं दो, हिंदी और उर्दू।।
आसिफ़ अंजुम कितनी प्यारी ज़बान है हिंदी,अपने भारत की शान है हिंदी।
अदीब दमोही देश कैसे बढ़ेगा आगे ‘अदीब ‘,इस पे हर क्षण विचार करते रहो।। 
डॉक्टर रफ़ीक़ आलमवहशियत के ख़ारज़ारों को मिटाना चाहिए,आदमीयत के महकते गुल, खिलाना चाहिए।
अफ़ज़ल दमोही नई राहें नई मंज़िल बनाना हमको आता है,वो हैं नादान जो समझे हमें मोहताज मंज़िल का।
तहसीन हैदर ज़ाफ़री गली-गली में जलाओ तुम एकता के चराग़,जलाओ और जलाओ बहुत अंधेरा है।
फ़रहत साहिब हमारा फूलता फलता हुआ शजर है वतन,लहू जो दे के मिला हमको वो समर है वतन। शाद दमोही अपना नहीं है कोई मददगार क्या करें,जीना हुआ है दोस्तो दुश्वार क्या करें।
मौलाना अतीक़ रज़ा दिल से लोगों के मैं नफ़रत को मिटा देता हूँ,मैं हूँ शायर मैं मुहब्बत को हवा देता हूँ। 
ताज दमोही बहुत ऊँचा है भारत में मक़ामे यौमे आज़ादी, सभी करते हैं दिल से एहतरामे यौमे आज़ादी।
मंज़र दमोही आओ मिलजुल के मुस्कुराएं हम,एकता का दिया जलाएं हम।अम्न और शांति के फूलों से,गुलशन-ए-हिंद को सजाएं हम।।
डॉ. ताबिश अहसन देश को बचाया है सबने देके क़ुर्बानी,आने वाली नस्लों को ये हमें बताना है।
शकील अमजद दूर हो जाएगा उस दिन पारसा होने का शक,रु-ब-रू जिस दिन तुम्हारे आईना हो जाएगा।
मानव बजाज है अंधेरा चाहे जिसको मार दो पत्थर अभी,कल यक़ीनन गुल हुईं ये बत्तियाँ जल जायेंगी।
मौलाना इरफ़ान नूरी हम अहले हिंद हैं हमने ये अपने दिल में ठाना है,सबक़ इंसानियत का सारी दुनिया को पढ़ाना है।
अख़्तर दमोहीजान की बाज़ी लगा देंगे ख़ुशी से ‘अख़्तर’,हम मगर मुल्क का मे’यार न गिरने देंगे।
डॉक्टर राशिद आँच आई अगर तुझ पर हम जान लुटा देंगे, ऐ प्यारे वतन तेरी इज़्ज़त हमें प्यारी है।
शेरी नशिस्त का संचालन अदीब दमोही द्वारा किया गया।कार्यक्रम के अंत में अदीब दमोही ने सभी का आभार व्यक्त किया।

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