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युवा कांग्रेस सम्मेलन के दौरान प्रदेश अध्यक्ष का विरोध, पर्दे के पीछे पनप रही राजनीति
मध्य प्रदेश कांग्रेस में एक समय युवा कांग्रेस के माध्यम से अगली पीढ़ी के नेता आते रहे हैं जिन्हें आगे लाने में तत्कालीन बड़े नेताओं की सकारात्मक भूमिका भी रही है। मगर अभी युवा कांग्रेस अध्यक्ष का साथ नहीं देने वालों पर कार्रवाई किए जाने के बाद सम्मेलन के दौरान जिस तरह विरोध दर्ज कराया गया, उसमें पर्दे के पीछे कोई और माना जा रहा है। इसमें कांग्रेस में दशकों से चली आ रही गुटीय राजनीति भी मानी जा रही है।
मध्य प्रदेश कांग्रेस में पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ-दिग्विजय सिंह, पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुरेश पचौरी-अरुण यादव और पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह बड़े नेता हैं जिनके समर्थक भी हैं। समर्थकों की वजह से नेताओं के बीच कार्यकर्ताओं का बंटवारा जैसा किए जाने से गुटीय राजनीति बढ़ी है। इन नेताओं में प्रदेश कांग्रेस के संगठन में आज भी दिग्विजय सिंह समर्थकों की संख्या ज्यादा है लेकिन कमलनाथ के मौजूदा कार्यकाल में पचौरी समर्थक संगठन पर हावी दिखाई देते हैं। कमलनाथ की कोर कमेटी में सुरेश पचौरी औऱ उनके समर्थक हैं जो नाथ के भोपाल में मौजूद होने पर प्रतिदिन शाम को बैठक में रहते हैं। पीसीसी का यह मैनेजमेंट अब पार्टी के दूसरे घटकों पर भी असर दिखाने लगा है।
युवा कांग्रेस में एक्शन के रि-एक्शन में पर्दे के पीछे कौन
प्रदेश युवा कांग्रेस के अध्यक्ष विक्रांत भूरिया ने हाल ही में तीन प्रदेश सचिव, एक जिला अध्यक्ष सहित करीब दो दर्जन पदाधिकारियों को पदमुक्त कर दिया था लेकिन इसका रि-एक्शन शुक्रवार को हुआ। यह रि-एक्शन युवा कांग्रेस के प्रदेश सम्मेलन के दौरान हुआ जब युकां के राष्ट्रीय नेता व कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी भी मौजूद थे। इस रि-एक्शन के पीछे पार्टी नेताओं की राजनीति प्रतिद्वंद्विता की चर्चा है। भूरिया के पिता पूर्व केंद्रीय मंत्री व वरिष्ठ विधायक कांतिलाल भूरिया दिग्विजय सिंह समर्थक हैं और हाल ही में मोर्चा-विभागों का समन्वय का काम पीसीसी मीडिया विभाग की पूर्व अध्यक्ष शोभा ओझा को दिया गया है, जो पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी की करीबी हैं। पदमुक्त किए गए युकां पदाधिकारियों में से कुछ पार्षद बताए जा रहे हैं और भूरिया पर आरोप लगाया जा रहा है कि वे हां में हां मिलने वालों को ही पसंद करते हैं।




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