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मेहुल इंटरपोल RED_NOTICE निरस्त मामले में CBI की सफाई, क्राइम पर असर नहीं-नोटिस बहाली प्रयास शुरू
पंजाब नेशनल बैंक धोखाधड़ी मामले में भगोड़े मेहुल चौकसी के इंटरपोल रेड नोटिस निरस्त होने पर सीबीआई ने सफाई दी है और कहा है कि इससे चौकसे के आर्थिक अपराध पर कोई असर नहीं पड़ेगा। इंटरपोल रेड नोटिस के पहले ही भारत ने उसके एंटीगुआ-बारबुड़ा में होने का पता लगा लिया था और अब निरस्त रेड नोटिस की बहाली के लिए तेजी से प्रयास शुरू कर दिए गए हैं। सीबीआई ने सफाई में कहा है कि भारत से भगोड़े अपराधियों को लाने में 15 महीने में रिकॉर्ड सफलता मिली है और 30 अपराधियों को भारत वापस लाया जा चुका है। आईए बताते हैं सीबीआई ने सफाई में क्या कहा।
सीबीआई के अधिकृत बयान में बताया गया है कि मेहलु चौकसी व अन्य के खिलाफ 15 फरवरी 2018 को आईपीसी व भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज हुई थी। इसके बादसीबीआई ने फरवरी में ही इंटरपोल से उसे भगोड़ा अपराधी घोषित कराया था। चौकसी ने कमीशन फॉर कंट्रोल ऑफ इंटरपोल फाइल्स (CCF) से संपर्क कर रेड नोटिस जारी नहीं करने का अनुरोध किया लेकिन सीबीआई के परामर्श के बाद उसके खिलाफ दिसंबर 2018 में इंटरपोल का रेड नोटिस जारी हुआ था। मगर रेड नोटिस के पहले ही भारत ने उसकी लोकेशन पता कर ली थी कि वह एंटीगुआ-बारबुड़ा में है। उसके प्रत्यपर्ण के लिए भारत की ओर से प्रयास भी शुरू कर दिए गए थे।
चौकसी ने सीसीएफ में नोटिस निरस्त करने प्रयास किए
सीबीआई ने बयान में कहा है कि इंटरपोल के रेडनोटिस जारी होने के बाद मेहुल चौकसी ने उसे निरस्त कराने के प्रयास किए थे लेकिन 2020 में उसके आग्रह को इंटरपोल ने निरस्त कर दिया था। भारत की एंटीगुआ-बारबुड़ा से मेहुल चौकसी के प्रत्यपर्ण की कोशिशें चल रही थीं और इस दिशा से ध्यान भटकाने के लिए चौकसी ने फिर सीसीएफ में पहुंच की। इस बार उसके रेडनोटिस को नवंबर 2022 में हटाने का फैसला हो गया।
रेडनोटिस से अपराध पर फर्क नहीं
सीबीआई का दावा है कि इंटरपोल के रेडनोटिस को निरस्त किए जाने से मेहुल चौकसी के अपराध पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। भारत की ओर से फिर रेडनोटिस की बहाली के प्रयास किए जा रहे हैं। सीबीआई का कहना है कि चौकसी के प्रत्यपर्ण के लिए इंटरपोल रेडनोटिस की आवश्यकता नहीं है। सीबीआई भारत के भगोड़ों व अपराधियों की भारत वापसी के लिए प्रतिबद्ध है।




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