मेघनाद, कुम्भकर्ण, रावण वध और श्रीराम राज्याभिषेक प्रसंगों का मंचन

एकाग्र ‘गमक’ श्रृंखला अंतर्गत  पाँच दिवसीय रामलीला के समापन दिवस 24 अक्टूबर को मेघनाद, कुम्भकर्ण, रावण वध और श्रीराम राज्याभिषेक प्रसंगों का मंचन किया गया। श्रीराम वानर सेना के साथ लंका विजय के लिए प्रस्थान करते हैं| अंगद दो अंतिम बार रावण के दरबार में दूत बनाकर भेजते हैं| रावण का अहंकार फिर भी कम नहीं होता| युद्ध होता है और रावण के भाई कुम्भकरण, पुत्र मेघनाथ आदि का वध करते हैं| 

अंत में रावण स्वयं रणभूमि में आता है और श्रीराम और रावण के बीच भीषण युद्ध होता है, तभी विभीषण प्रभु श्रीराम को रावण की मृत्यु का रहस्य बताते हैं और श्रीराम, रावण की नाभि में बाण मार कर उसका अंत कर देते हैं| युद्ध पश्चात् पुष्पक विमान से भगवान् श्रीराम भाई लक्ष्मण और सीता तथा अन्य साथियों सहित अयोध्या लौटते हैं| अयोध्या में खुशियाँ मनाई जाती हैं, श्रीराम का राज्याभिषेक होता है| चारों तरफ हर्ष का माहौल है|  

          खजूरीताल की पारंपरिक लीला मण्डली के छोटे-बड़े कलाकारों द्वारा भावपूर्ण अभिनय, प्रेरक संवाद, उत्कृष्ट वेशभूषा और सुगठित दृश्य-बिम्व के साथ पाँच दिवसीय श्रीरामलीला उत्सव का समापन हुआ|  

          मध्यप्रदेश की इस पारंपरिक लीला मण्डली के साथ समकालीन नाट्य प्रयोगों को जोड़ते हुए संवाद, अभिनय, वेशभूषा, रंगभूषा, प्रकाश, मंचीय सज्जा आदि का कार्य परिष्कार की दृष्टि से किया गया| ख्यात रंगकर्मी, निर्देशक श्री जयंत देशमुख, मुंबई ने इन कलाकारों के साथ कथा मंचन के पूर्व अभ्यास और संवाद के माध्यम से परिष्कार का कार्य किया  |   

          जनजातीय संग्रहालय के मुक्ताकाश मंच पर नवाचार और नयनाभिराम दृष्य बिम्बों में प्रस्तुत हो रही इस रामलीला को दर्शकों द्वारा काफी सराहा गया | दर्शकों ने करतल ध्वनि से कई बार कलाकारों का उत्साह वर्धन किया|  

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