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मातृशक्ति के हाथों में होता है संस्कारों का बीजारोपणः भारती
राष्ट्रसेविक समिति की स्थापना वंदनीय प्रमुख संचालिका लक्ष्मीबाई केलकर ने विजयादशमीं के दिन की थी। स्थापना दिवस के अवसर पर संचलन निकाला जाता है और समाज में अच्छी शक्ति का प्रदर्शन कर प्रभाव डालने के लिए संगठित होती हैं। हम सभी समाज का नेतृत्व करने वाले हैं और सबको जोड़ने का कार्य करते हैं ताकि देश अच्छी दिशा में बढ़ सके। यह बात भोपाल विभाग द्वारा आयोजित पथ संचलन में शामिल हुई सेविकाओं को राष्ट्र सेविका समिति कि प्रांत सह-कार्यवाहिका भारती ने संबोधित करते हुए कही।
भारती ने कहा कि भारत विश्व का मार्गदर्शन करता रहा है और करता रहेगा। भारत ही है जो पूरे विश्व के कल्याण की बात करता है, यह भाव विश्व की किसी भी संस्कृति में नहीं पाया जाता। उन्होंने भारत की इस श्रेष्ठ संस्कृति की संवाहक और धारक स्त्री को बताया। वे बोलीं कि संस्कारों का समुच्चय संस्कृति है और संस्कारों का बीजारोपण करना मातृशक्ति के हाथों में होता है, नारी राष्ट्र की आधारशक्ति है। इसलिए शक्ति की उपासना हमारे देश की प्राथमिकता रही है। उन्होंने नवरात्रि के पर्व पर प्रकाश डाला। साथ ही सेविकाओं को अभिमान रहित रहने की बात कही।
एकल गीत की प्रस्तुति
इस दौरान कार्यक्रम की अध्यक्ष डॉ शशि ठाकुर महिला आयोग समिति सदस्य एवं अल्का देशमुख विभाग कार्यवाहिका की मंच पर उपस्थिति रही। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलित कर भारत माता एवं समिति की संस्थापिका का स्मरण करते हुए की गयी. इस दौरान नारी शक्ति को एकत्रित करते हुए एकल गीत की प्रस्तुति की गयी।
150 से अधिक सेविकाओं ने संचलन में रहीं उपस्थित
राष्ट्रसेविका समिति की स्थापना दिवस के अवसर पर भोपाल विभाग की सेविकाओं द्वारा भव्य पथ संचलन निकाला. मिनाल रेसीडेंसी के गेट नंबर 1 से प्रारंभ हुए संचलन में सेविकायें घोष वादन करते हुए कदम से कदम मिलाकर निकलीं. संचलन दुर्गेश विहार, नैन्गिरी, खेडापति मंदिर, सचिदानंद नगर, टी पॉइंट से होकर पतंजलि योग केंद्र पर समाप्त हुआ. इसमें विभाग अंतर्गत आने वाले पांच जिलों विक्रम, विद्धुत, प्रताम, टोपे, भोजपुर आदि से १५० से भी अधिक सेविकाओं ने पूर्ण गणवेश में सहभागिता की. इस दौरान संचलन पर नागरिकों ने जगह-जगह पर पुष्पवर्षा कर स्वागत किया. संचलन पर पुष्पवर्षा करते हुए नागरिक जय श्री राम, भारत माता की जय के नारे भी लगा रहे थे। उल्लेखनीय है नारी शक्ति में जागृति उत्पन्न कर, उसे एकजुट करना एवं उसे राष्ट्र निर्माण के कार्य में लगाने के उद्द्देश्य से राष्ट्र सेविका समिति की विजयादशमी को स्थापना की गयी थी. अपने स्थापना दिवस के अवसर पर प्रत्येक वर्ष समिति की सेविकाएँ पथ संचलन निकालती हैं.




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