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माकपा ने वाहन रैली निकाल कर किया प्रदर्शन
किसान विरोधी-जन विरोधी कृषि कानूनों को वापस लिये जाने की मांग को लेकर दिल्ली में किसानों के आंदोलन एवं देश भर में जारी किसान आंदोलन के दौरान अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के राष्ट्रीय आह्वान पर आज 8 दिसम्बर 2020 को किसान एवं मजदूर संगठनों ने प्रदेश भर में प्रदर्शन किया।
आज 8 दिसम्बर को राजधानी भोपाल में माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के आह्वान पर विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ताओं ने वाहन रैली निकाल कर प्रदर्शन किया। सुबह 11.00 बजे मा.क.पा. राज्य कार्यालय के समक्ष एकत्रित कार्यकर्ताओं ने वाहन रैली निकाल कर प्रभात चौक, 80 फीट रोड, नादरा बस स्टैंड, भारत टाकीज आदि होते हुये नीलम पार्क में जारी किसानों के धरना स्थल पहुंच कर कसान आंदोलन के समर्थन में प्रदर्शन करते हुये कार्यवाही
समाप्त की। प्रदर्शन में मध्य प्रदेश किसान सभा, सीटू, जनवादी महिला समिति, स्टूडेन्ट फेडरेशन आफ इंडिया (एस.एफ.आई.) के कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया।
इस दौरान नीलम वार्क में प्रदर्शनकारियों को माकपा जिला सचिव पी व्ही रामचन्द्रन, सीटू के पूघण भट्टाचार्या, पी.एन. वर्मा, जनवादी महिला समिति की संध्या शैली ने सम्बांधित किया। वक्ताओं ने कहा कि किसान आंदोलन के प्रति मोदी सरकार का रवैया तानाशाहीपूर्ण है, इसके विरोध में देश भर के किसानों एवं आम जनता में आक्रोश है।
केन्द्र सरकार द्वारा कोविड संक्रमण एवं लाकडाउन के दौरान किसान संगठनों एवं कृषि विशेषज्ञों से चर्चा किये बिना पहले अध्यादेश के माध्यम से जबरन देश में कृषि कानून लागू किया एवं बाद में संसद में संसदों के विरोध को नजरंदाज कर तीन कृषि कानूनों को अनुचित तरीके से पारित किया। यह कानून न केवल किसान विरोधी है, बल्कि यह जन विरोधी भी है। इन कानूनों के माध्यम से कृषि में कारपोरेट्स का कब्जा होने के साथ असीमित भण्डारण का अधिकार मिलने से अनाज एवं कृषि उत्पादों पर देशी विदेशी कारपोरेटों का एकाधिकार हाना तय हैे, जिससे आगे चलकर सार्वजनिक वितरण प्रणाली भी बुरी तरह से प्रभावित होगी जो सीधे सीधे आम जनता को बुरी तरह से प्रभावित करेगी। यह कानून कृषि उपज मंडियों को भी समाप्त करेगी। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने तीनों कृषि कानूनों के साथ प्रस्तावित बिजली संशोधन विधेयक भी वापस लेने की मांग की। उल्लेखनीय है कि किसान संगठनों के द्वारा आयोजित इस भारत बंद का देश के 10 केन्द्रीय श्रमिक संगठनों, विभिन्न जनसंगठनों एवं राजनीतिक पाटियों ने समर्थन किया था।




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