मां को घर वापस ले जाने, आपातकाल पर ही टिका रहा अंतिम सत्र

मध्यप्रदेश विधानसभा के इतिहास में चौदहवीं विधानसभा का अंतिम मानसून सत्र अब तक का सबसे छोटा सत्र साबित हुआ है। पांच दिन का सत्र बुलाया गया था मगर दो ही दिन में सत्र का अविश्वास प्रस्ताव, भाजपा नेता नीलम मिश्रा के पति की गिरफ्तारी-रिहाई और अनुसूचित जाति जनजाति के बंद के आव्हान पर हुए दंगों को लेकर कांग्रेस-भाजपा ने गर्भग्रह में चले गए। कई बार दोनों तरफ से चेतावनियां दी गईं लेकिन किसी भी पक्ष ने कमजोर रूप से जवाब देने का प्रयास नहीं किया। इसके चलते अनिश्चतकाल के लिए मानसून सत्र को समाप्त कर दिया गया। चौदहवीं विधानसभा में तेरहवीं विधानसभा जैसे हालात बने जिसमें कांग्रेस का इस बार अप्रत्यक्ष रूप से कांग्रेस के विधायकों ने भाजपा की महिला विधायक का साथ दिया। एक स्थानीय मंत्री के इशारे पर अपने पति, परिवार और क्षेत्र की जनता की जान को खतरा होने का आरोप लगा है। भाजपा विधायक को सदन में निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया गया है लेकिन आधा घंटे में उऩके पति अभय मिश्रा की गिरफ्तारी सूचना आने पर वे सदन के गर्भ गृह में धरने पर बैठ गईं। उनका साथ दिया कांग्रेस की महिला विधायक भी नीलम मिश्रा के साथ धरने पर बैठ गईं।
विधान सभा की कार्यवाही पांच दिन की जगह दो दिन में समाप्त करने के लिए एकसाथ 18 विधेयक लाए गए। ये विधेयक विधायकों के पास पहुंचे ही नहीं और चर्चा के लिए शोरशराब के बीच समस्याओं से पीड़ित विधायक इसमें भाग नहीं ले सके। कई विधायकों ने एक दूसरे पर व्यक्ति नारे भी लगाए।
बात आपात काल से शुरू हुई जिसमें इंदिरा गांधी, संजय गांधी, कमलनाथ आदि का नाम लेकर उसकी आलोचना की गई। आज जब उनसे बात करते हैं वे कुछ और कहते हैं। इसलिए पौधों को लगातार सीचें।

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