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मध्य प्रदेश भ्रष्टाचार की जांच एजेंसी ईओडब्ल्यू में विडंबनाः अफसर रिलीव, पोस्टिंग का इंतजार
ईं टेंडर-कन्यादान घोटाले जैसे भ्रष्टाचार के मामलों की जांच करने वाली एजेंसी आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) राज्य सरकार के गृह विभाग की मनमानी से विवेचना करने वाले अधिकारियों के टोटे से गुजर रहा है। गृह विभाग ने डीएसपी-इंस्पेक्टर को वापस तो ले लिया लेकिन उनके एवज में एक महीने बाद भी कोई पोस्टिंग नहीं की है। गृह विभाग और पुलिस मुख्यालय इनकी पदस्थापना करने संबंधी फाइलों को एक टेबल से दूसरी टेबल पर घुमा जरूर रहे हैं मगर फैसला नहीं कर रहे हैं।
मध्य प्रदेश आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) के पास इस समय ई-टेंडर और कन्यादान घोटाले सहित जबलपुर के पूर्व बिशप पीसी सिंह, जबलपुर आरटीओ संतोष पाल का अनुपातहीन संपत्ति का मामला, महिला बाल विकास विभाग का आयरन फ्रेम घोटाला, बालाघाट के बिजली कंपनी के सहायक यंत्री दयाशंकर प्रजापति के अऩुपातहीन संपत्ति मामले, भोपाल के स्वास्थ्य विभाग के क्लर्क हीरो केसरवानी जैसे कई मामलों की विवेचना चल रही है। इन मामलों की जांच कर रहे डीएसपी और इंस्पेक्टरों को राज्य शासन ने पिछले दिनों ईओडब्ल्यू से स्थानांतरित कर पुलिस मुख्यालय और अन्य जगहों पर पदस्थ कर दिया था।
बिना विकल्प के तबादले-रिलीव
भ्रष्टाचार की जांच करने वाली एजेंसी से विवेचना के अधिकार प्राप्त डीएसपी व इंस्पेक्टर को बिना विकल्प के ईओडब्ल्यू से स्थानांतरित कर दिया गया। काफी समय तक स्थानांतरित अधिकारियों को ईओडब्ल्यू ने रिलीव नहीं किया क्योंकि उनके स्थान पर दूसरे डीएसपी या इंस्पेक्टर की पदस्थापना नहीं की गई थी। स्थानांतरित अधिकारियों को रिलीव करने के लिए दबाव बनाकर राज्य शासन ने उन्हें रिलीव भी करा लिया। इसके बाद भी उनकी जगह दूसरे अधिकारियों की पदस्थापना नहीं की गई। ईओडब्ल्यू की सागर जैसी इकाई में दो महिला अधिकारी पूरी जिम्मेदारी संभाल रही हैं तो जबलपुर में भी स्थिति चिंताजनक है औऱ ग्वालियर-इंदौर में भी स्थिति ऐसी है। भोपाल इकाई इस मामले में ठीकठाक स्थिति में है।
विकल्प में रिकॉर्ड के आधार पर नाम भेजे, फैसला नहीं हुआ
बताते हैं कि ईओडब्ल्यू ने अपने यहां विभिन्न प्रकरणों की जांच कर रहे अधिकारियों के तबादले के बाद उनके एवज में डीएसपी-इंस्पेक्टर की पदस्थापना के लिए नाम भेजे थे। इनके रिकॉर्ड के आधार पर राज्य शासन को नाम भेजे गए लेकिन करीब तीन सप्ताह बाद भी कोई फैसला नहीं हो सका है। पदस्थापना के लिए नामों की छंटनी हो चुकी है लेकिन फाइल पीएचक्यू-गृह विभाग के बीच चक्कर काट रही है। इस बारे में ईओडब्ल्यू डीजी अजय शर्मा का कहना है कि जल्द ही पदस्थापना हो जाएगी। वे कहते हैं कि ईओडब्ल्यू में अच्छे रिकॉर्ड के अधिकारियों की पदस्थापना होना है।




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