मध्यप्रदेश मंत्रिमंडल का विस्तार गुरुवार को, संभावितों ने लगाया जोर

मध्यप्रदेश के शिवराज कैबिनेट विस्तार को लेकर को दो साल से चल रही अटकलों के बीच अब विराम मिलने की संभावना है। अटकलों के दौर में मंत्रिमंडल सेहटाए जाने वाले या पर करते जाने वाले नेताओं से लेकर जिन लोगों के शामिल होने के आसार नजर आ रहे हैं, वे सभी बीजेपी हाईकमान से लेकर प्रदेश नेतृत्व और सरकार के मुखिया शिवराज सिंह चौहान पर दबाव बना रहे हैं। दिल्ली से लेकर भोपाल तक दिनभर गहमा गहमी चलती रही और बीजेपी नेतृत्व के पाले में गेंद पहुंच चुकी है। आज दिल्ली में शाम करीब चार बजे तक बीजेपी नेताओं की मीटिंग का दौर चला और इसके बाद नाम फायनल किए गए। विस्तार गुरुवार सुबह साढ़े ग्यारह बजे होने की संभावना है।
मध्यप्रदेश सरकार द्वारा निगम-मंडल अध्यक्षों की नियुक्ति के बाद अब बहुप्रतीक्षित मंत्रिमंडल विस्तार करने जा रही है। विस्तार को लेकर काफी समय से चर्चाएं चल रही थीं लेकिन हर बार नेता टालते रहे थे। इस बार मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने चीन यात्रा पर जाने के पहले स्वयं ही 30 जून तक मंत्रिमंडल विस्तार की घोषणा कर दी थी। इससे मंत्रिमंडल में शामिल होने के लिए काफी समय से सक्रिय विधायकों ने नए सिरे से कवायद तेज कर दी थी। नेता पुत्रों के लिए उनके पिता और उनके करीबी केंद्रीय नेतृत्व से लेकर आरएसएस के माध्यम से प्रयास करने लगे तो पिछली सरकार में मंत्री रहे विधायकों ने भी अपने-अपने आकाओं के माध्यम से कैबिनेट में स्थान पाने की गोटियां बैठाना शुरू कीं। वहीं कैबिनेट में शामिल मंत्रियों ने अपना कद बढ़ाने के लिए कोशिशें तेज कीं। दिल्ली में शाम साढ़े चार बजे तक बैठकों का दौर चलता रहा। अमित शाह तक शिवराज सिंह चौहान और विनय सहाबुद्धे ने बातचीत की।

मंत्रिमंडल में शामिल होने के लिए नए चेहरों में कभी प्रदेश बीजेपी के कोषाध्यक्ष रहे पूर्व सांसद कैलाश सारंग के पुत्र विश्वास सारंग हैं जो दो बार के विधायक हैं। हालांकि भोपाल से दो मंत्री होने के कारण उनका दावा कमजोर है लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री व शिवराज सिंह चौहान मंत्रिमंडल के वरिष्ठ मंत्री बाबूलाल गौर के हटाए जाने पर उन्हें कैबिनेट में जगह दी जा सकती है। मगर भोपाल के हुजूर सीट के विधायक रामेश्वर शर्मा भी मंत्री बनने की कोशिश में हैं जिनका दावा बेहद कमजोर है। अगर मंत्रिमंडल से गौर की विदाई होती है तो सारंग, रामेश्वर से ज्यादा मजबूत दावेदार रहेंगे।
वहीं ग्वालियर जयभान सिंह पवैया भी एक दावेदार हैं जो काफी वरिष्ठ नेता हैं। अयोध्या के विवादित बाबरी मस्जिद ढांचे के गिराए जाने के समय वे काफी चर्चा आए थे। इसी क्षेत्र के विधायक रुस्तम सिंह भी मंत्रिमंडल में जाने के लिए काफी समय से कोशिश कर रहे हैं। वे पिछली सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। जयभान सिंह और रुस्तम सिंह के दावों के कारण इनमें से किसी भी एक को मौका मिल सकता है।

पूर्व केंद्रीय मंत्री विक्रम वर्मा की पत्नी व दो बार की विधायक नीना वर्मा की दावेदारी भी इस बार है लेकिन उनके आड़े पूर्व मंत्री रंजना बघेल आ सकती हैं। रंजना बघेल पिछली शिवराज सरकार में मंत्री रहते सक्रियता और इसके साथ ही उनके लंबे अनुभव के कारण नीना वर्मा से उनका दावा मजबूत है। इसी तरह पिछली सरकार में मंत्री रहीं अर्चना चिटनीस की दावेदारी भी काफी मजबूत है और वे मंत्री रहते काफी सफल नेता रहीं। अपने विभाग पर अच्छा कंट्रोल था।

इनके अलावा मौजूदा मंत्रिमंडल के सदस्यों में पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर, पीडब्ल्यू मंत्री सरताज सिंह, पशुपालन मंत्री कुसुम मेहदेले को बाहर किए जाने की पूरी संभावना है। इन मंत्रियों की उम्र के कारण उन्हें मंत्रिमंडल से बाहर किए जाने की बात सामने आ रही है। वहीं मंत्रिमंडल के सबसे सशक्त सदस्यों डॉ. नरोत्म मिश्रा, रामपाल सिंह, भूपेंद्र सिंह को और अच्छे विभाग दिए जा सकते हैं तो वरिष्ठ मंत्री जयंत मलैया व गोपाल भार्गव के कुछ विभागों को वापस लिया जा सकता है।

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